ताऊ देवीलाल की विरासत के लिए वोट मांगने वाले जेजेपी के नेताओं की सभाएं करवाने के बावजूद यहां शिकस्त का मुंह देखना पड़ा है। सरकार में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला और पिता अजय चौटाला का आना भी यहां के मतदाताओं को बांध नहीं सका। अंतत : यह सीट यहां से लगातार जीतती आ रही कांग्रेस की झोली में चली गई। जिसे लेकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुडडा और उनके सुपुत्र दीपेंद्र हुडडा फूले नहीं समा रहे हैं।
यह है गणित
भाजपा को एक साल पहले हुए बरोदा चुनाव में 32,214 और जजपा को 26,932 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस को 36,851 मत प्राप्त हुए थे, लेकिन इस उपचुनाव में कांग्रेस को 60,132 मत प्राप्त हुए, यह मत पिछले चुनाव से 23,281 अधिक हैं। भाजपा को इस चुनाव में 50,176 मत मिले। भाजपा जजपा गठबंधन यह मान कर चल रहा था कि इस बार भी पिछला मत प्रतिशत मिल जाएगा तो चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन गठबंधन होने के बावजूद यह आंकड़ा पिछले चुनाव के बराबर भी नहीं पहुंच सका।
हुडडा का कद बढ़ा
बरोदा में लगातार चौथी बार कांग्रेस की जीत से हुड्डा का कद आलाकमान के सामने बढ़ गया है। हुड्डा पिता-पुत्र की मेहनत इस चुनाव में रंग लाई और सरकार का पूरा जोर होने के बावजूद वे चुनाव जीत गए। विधानसभा चुनाव में 29 सीटे जीतने के बाद यह उपचुनाव मिलाकर अब कांग्रेस के खाते में 30 सीटे आ गई हैं।
बड़े चौटाला का जादू भी नहीं चला
बरोदा के रण में यह माना जा रहा था कि बड़े चौटाला के मैदान में आने से इनेलो को बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन यहां भी पिता-पुत्र की जी-तोड़ मेहनत के बावजूद वोटों का यह आंकड़ा दस हजार तक भी नहीं पहुंच पाया। पिता ओम प्रकाश चौटाला और पुत्र अभय सिंह चौटाला ने बरोदा चुनाव में जीत के लिए काफी पसीना बहाया लेकिन जनता जनार्दन ने कांग्रेस को चुना।