वर्ष 1987 में लोकदल के परमानंद ने जींद से जीत दर्ज की और उन्हे वनमंत्री भी बनाया गया। अब करीब 23 साल से जीत को तरस रही कांग्रेस ने वर्ष 1991 में आजाद प्रत्याशी के रूप में जीत चुके मांगेराम गुप्ता को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा और मांगेराम गुप्प्ता विजयी रही। मगर 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की प्रदेश में अच्छी लहर थी और वे कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) बना चुके थे। इसी लहर में इस बार जींद से हविपा के बृजमोहन सिंगला विजयी रहे।
लेकिन सन 2000 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मांगेराम गुप्प्ता ने फिर से बाजी मारी और वे तीसरी बार जींद के विधायक बने। 2005 में भी जींद के मतदाताओं ने कांग्रेसी प्रत्याश्या मांगेराम गुप्ता को ही विधायक बनाया। मगर 2009 के चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई और डा. हरिचंद मिड्डा को विधायक बनवाया। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में हरिचंद मिड्डा अपने बढ़िया रसूख के चलते फिर से जींद के विधायक बने।
अब वर्ष 2018 में उनके निधन के बाद 28 जनवरी 2019 को जींद में उपचुनाव होना है। इनेलो चाहती है कि जीत के इस सिलसिले को जारी रखे। लेकिन अपना खाता खोलने को बेताब सत्तासीन भाजपा ने ऐन वक्त पर दिवंगत विधायक हरिचंद मिड्डा के बेटे कृष्ण मिड्डा को भाजपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया है। भाजपा के इसी दांव को देखते हुए कांग्रेस ने भी मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी केमीडिया प्रभारी एवं कैथल के विधायक रणदीप सुरजेवाला को जींद केरण में उतारा है। बहरहाल, अब देखना यह है कि कौन सा दल इस सीट पर मतदाताओं को प्रभावित कर पाता है।