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पंजाब के नए 'कैप्टन' पर दोतरफा हमला, भाजपा-आप ने लगाए गंभीर आरोप

Sun, 26 Mar 2017 08:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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captain amrinder singh - फोटो : File Photo
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प्रदेश भाजपा प्रधान विजय सांपला ने आरोप लगाया है कि पंजाब में मुख्यमंत्री बदलते ही बदले की राजनीति हावी होने लगी है। कानून-व्यवस्था चरमराने लगी है। अकाली-भाजपा गठबंधन के खिलाफ बदले की राजनीति की जा रही है।
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दूसरी तरफ कपूरथला जेल में गैंगवार और गुरदासपुर जेल ब्रेक की कोशिश जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। सांपला ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि बदले की राजनीति है। कई जगह कांग्रेसियों द्वारा हथियारों के दम पर ट्रक यूनियनों पर नियंत्रण की कोशिश, अमृतसर के गांव में कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा अकाली वर्कर की हत्या समेत कई घटनाएं हुई हैं।

कांग्रेस विधायक, भाजपा नेतृत्व वाली कमेटियों व पंचायतों पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं। अगर इन पर लगाम न लगाई गई तो भाजपा सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह को सुर्खियों में रहने के बजाय चुनावी वादे पूरे करने चाहिए।
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विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है कांग्रेस : खैरा

आप नेता सुखपाल खैहरा - फोटो : फाइल फोटो
पंजाब में आम आदमी पार्टी के चीफ व्हिप सुखपाल खैरा ने कहा है कि जिस पार्टी ने छह महीने पहले हो-हल्ला कर विधानसभा का प्लेटफार्म हाईजैक कर लिया था, उसने आज यू-टर्न ले लिया है। कांग्रेस मौजूदा सत्र में विपक्ष को पंजाब के मुद्दों पर बहस करने से इंकार कर रही है।

इसी कांग्रेस ने शिअद-भाजपा पर आरोप लगाते हुए 48 घंटे तक विधानसभा के अंदर प्रदर्शन किया था। कई बार इसी मुद्दे पर वाक आउट किया है कि गठबंधन उनकी आवाज दबा रहा है। अब वही कांग्रेस विपक्ष को पंजाब के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रखने से रोक रही है। कांग्रेस के प्रस्ताव के मुताबिक 28 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद बहस नहीं कराई जाएगी। 29 को सरकार वोट ऑन अकाउंट और सीपीएस बिल लाएगी। 

खैरा ने कहा कि सत्र को दो दिन और बढ़ाया जा सकता था, ताकि राज्यपाल के अभिभाषण पर अच्छी बहस हो सकती। आप नशों, आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्याओं और इंडस्ट्री की बुरी हालत जैसे मुद्दे उठाना चाहती थी। इसके अलावा सीएम के ओएसडी और सलाहकारों का मुद्दा भी था। बीआईएस चाहल को सलाहकार बनाने से साफ है कि कैप्टन की पुरानी टीम फिर काबिज हो गई है। पिछले कार्यकाल में चाहल और स्व. एसके सिन्हा को हटाने के लिए सोनिया गांधी को दखल देना पड़ा था। उन्होंने मांग की है कि स्पीकर सत्र को दो दिन और बढ़ाएं और गंभीर मुद्दों पर बहस कराएं। 
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