यह नंबर एक प्रकार से इसके निर्माता का पता होगा। ब्यूरो की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड मैन्यूफैक्चर्स की पूरी डिटेल होगी। इससे आसानी से पता चल सकेगा कि यह ज्वेलरी कहां पर बनाई गई है? ब्यूरो ने यह प्रपोजल केंद्र सरकार को भेजा था, जहां से उसे स्वीकृति मिल चुकी है।
ज्वेलरी पर यूनिक नंबर लगाने की जरूरत क्यों?
चंडीगढ़ पहुंचे भारतीय मानक ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल आईएएस सुनील सोनी ने बताया कि तीन महीने के भीतर यह योजना भारत में लागू हो जाएगी। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि इससे सोने की शुद्धता की पूरी तरह से गारंटी होगी। नकली सोने के कारोबार पर लगाम लग सकेगी। यह ऐसा यूनिक नंबर होगा, जिसकी कोई कोडिंग नहीं कर पाएगा। इससे पहले ब्यूरो की तरफ हालमार्क ज्वेलरी लांच की गई थी। इससे काफी हद तक नकली सोने पर लगाम लग सकी थी और ग्राहकों को काफी फायदा पहुंचा।
मोबाइल एप्प से जांच सकेंगे गोल्ड की शुद्धता
सुनील सोनी ने बताया कि यूनिक नंबर के लिए विशेष रूप से एक मोबाइल एप भी डिजाइन की जा रही है। यह एप भी गोल्ड की शुद्धता जांचने का काम करेगा। जब ग्राहक ज्वेलरी खरीदने जाएगा तो शोरूम में ही एप में यूनिक नंबर डालकर इसके निर्माता की डिटेल देख सकेगा। इसे यूनिक नंबर योजना के साथ ही लांच करने की तैयारी है। इस एप को गूगल प्ले में जाकर आसानी से डाउनलोड किया जा सकेगा। यदि इस दौरान कोई गड़बड़ी पकड़ी जाती है तो कार्रवाई भी तेजी से की जाएगी।
हॉलमार्क ज्वेलरी के बारे में फैलाएंगे जागरूकता
भारतीय मानक ब्यूरो के डायरेक्टर ने बताया कि चंडीगढ़ सहित इस पूरे रीजन में देखा गया है कि हॉलमार्क ज्वेलरी को लेकर बहुत ही कम जागरूकता है। उनके मुताबिक इस रीजन में सिर्फ 15-20 प्रतिशत ही हालमार्क ज्वेलरी खरीदी जाती है, जबकि साउथ में करीब 70 प्रतिशत हॉलमार्क ज्वेलरी की डिमांड रहती है। हॉलमार्क ज्वेलरी सबसे शुद्ध ज्वेलरी होती है। इस बारे में और भी जागरूकता फैलाने की जरूरत है, ताकि ग्राहकों को फायदा मिल सके।