चंडीगढ़ में रामलीला के मंच पर रावण का किरदार निभाकर लंकेश के नाम से विख्यात हुए बीरेंद्र सिंह अब नहीं रहे। करीब 50 साल तक रामलीला में अभिनय करने वाले बीरेंद्र लगातार 25 साल रावण ही बने। बुधवार अलसुबह उन्होंने जीएमसीएच 32 में अंतिम सांस ली। 70 बरस के बीरेंद्र बीमार चल रहे थे। मनीमाजरा श्मशानघाट में उन्हें अंतिम विदाई देने काफी संख्या में लोग पहुंचे। वे पत्नी दो बेटे और दो बेटियों को छोड़ गए हैं।
चंडीगढ़ केंद्रीय रामलीला महासभा के चेयरमैन भूपेंद्र शर्मा का कहना है कि बीरेंद्र के जाने से रामलीला का एक अध्याय समाप्त हो गया है। हमने हमेशा उन्हें अपने किरदार में रचते बसते देखा। पिछले वर्ष गढ़वाल रामलीला मंडल (बिजली बोर्ड) सेक्टर 28 के मंच पर परिवार के साथ उनका स्वागत किया गया था। उस समय भी उन्होंने रावण के डायलॉग बोलकर सबको अचंभित कर दिया था। पिछले पांच साल से बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने खुद को अभिनय से दूर कर लिया था। हालांकि रामलीला देखने पहुंचते थे।
उनकी खासियत थी कि रावण के मुकुट को वह कभी नीचे नहीं रखते थे। पूरा सम्मान करते थे। उनकी बदौलत गढ़वाल रामलीला मंडल ने कई प्रतियोगिताएं जीतीं। गढ़वाल रामलीला 1960 में शुरू हुई थी। तभी से वह इसका हिस्सा बन गए थे। बिजली बोर्ड से जेई होकर रिटायर्ड हुए थे।