देश में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद मंगलवार को सुखना लेक के पास के एक मृत पक्षी मिलने से हड़कंप मच गया। पर्यावरण विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और नमूने एकत्रित किए। अब नमूने को जालंधर के क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू के मामले आने के बाद चंडीगढ़ वन और वन्यजीव विभाग ने सोमवार को ही अलर्ट जारी कर दिया था। विभाग ने सभी को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन के कई विभाग बर्ड फ्लू को लेकर सतर्क हो गए हैं और निगरानी बढ़ा दी है। इसके अलावा एक टीम का भी गठन किया गया है, जिसने मंगलवार को शहर के विभिन्न हिस्सों से नमूने एकत्रित किए। चंडीगढ़ प्रशासन के पशु चिकित्सा विभाग ने मनीमाजरा, हल्लोमाजरा के पोल्ट्री फॉर्म और सुखना लेक समेत शहर के विभिन्न जल निकायों से नमूने लिए हैं।
सभी नमूने जालंधर की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाएंगे। चंडीगढ़ के मुख्य वन संरक्षक देबेंद्र दलाई ने बताया कि उनकी तरफ से काफी सतर्कता बरती जा रही है। मंगलवार को विभिन्न टीमों ने पूरे दिन निरीक्षण किया लेकिन उन्हें कोई मृत पक्षी नहीं मिला लेकिन शाम को उन्हें जानकारी मिली कि सुखना के रेगुलेटरी एंड पर एक मृत पक्षी देखा गया, जिसके बाद टीम वहां पहुंची और उन्हें नमूना लेने के लिए कहा गया। दलाई ने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों से पशु चिकित्सा विभाग ने नमूने लिए हैं, जिनकी जांच की जाएगी। दलाई ने कहा कि शहर में अभी तक कोई भी बर्ड फ्लू का मामला सामने नहीं आया है, न ही किसी पक्षी में इसके लक्षण दिखाई दिए हैं।
कर्मचारियों को सतर्क रहने को कहा गया
वन और वन्यजीव विभाग ने फील्ड के कर्मचारियों से कहा है कि यदि वन क्षेत्र में किसी पक्षी की मौत होती है तो उसकी जानकारी तुरंत विभाग को दें। पशुपालन विभाग को भी अपने एरिया में निगरानी तेज करने के निर्देश दिया गया है। पशुपालन विभाग मुर्गी पालकों पर भी नजर रख रहा है।
गौरतलब है कि शहर में वर्ष 2014 में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उसके बाद नमूने पहले जालंधर भेजे गए और फिर भोपाल, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने सुखना झील की घेराबंदी कर लोगों के प्रवेश, बोटिंग और पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। एहतियात के तौर पर लेक की सभी बत्तखों को मार दिया गया था।