सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा की ओर से गोद लिए गांव दाऊं के पास स्थित गांव रायपुर में कुछ समय पहले हुई मोरों की मौत बर्ड फ्लू से नहीं हुई थी। बल्कि उनकी मौत की वजह किसानों द्वारा प्रयोग की जाने वाली कीटनाशक दवाईयां हो सकती हैं। यह बात जालंधर लैब में शवों के जांच के बाद सामने आई है। वहीं, लैब ने अपनी रिपोर्ट पीएयू को भेज दी है। अब यूनिवर्सिटी स्टडी करेगी कि किस कीटनाशक से मौर मौत हुई है। इसके बाद संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।
जानकारी के मुताबिक 14 नवंबर को गांव में उस समय सनसनी फैल गई थी। जब लोगों ने खेतों में मरे हुए मोर देखे थे। इसके बाद तुरंत वन विभाग की टीम हरकत में आई और मरे हुए मोर अपने कब्जे में ले लिए थे। पहले उनकी पोस्टमार्टम मोहाली में ही कराने की तैयारी थी। लेकिन बर्ड फ्लू की आशंका के चलते उक्त सैंपल वन विभाग ने सीधे जालंधर भेज दिए थे। जालंधर स्थित लैब के डायरेक्टर विनय मोहन ने बताया कि बर्ड फ्लू से मोरों की मौत नहीं हुई थी। यह मामला कीटनाशक का लग रहा है। इस संबंधी पीएयू को रिपोर्ट भेजी गई है। जिसके बाद ही आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।