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चंडीगढ़ में बर्ड फ्लू की पुष्टि, जानिए महत्वपूर्ण तथ्य

Thu, 18 Dec 2014 06:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद भी यूटी प्रशासन अभी बाकी सैंपल की रिपोर्ट के इंतजार में है। उधर दूसरी ओर, सुखना लेक पर बतखों का मरना जारी है। बुधवार को भी एक बतख की मौत हो गई है।
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पिछले हफ्ते से लेक पर कुल 25 बतखों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरा शहर सकते हैं। लेक पर बतखें पर्यटकों में आकर्षण का केंद्र रहती हैं और इनकी लगातार हो रही मौत से पर्यटकों में भी मायूसी है।

प्रशासन के वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट का कहना है कि अभी एक ही रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इससे अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल होगा। दरअसल, डिपार्टमेंट ने बतखों के सात सैंपल टेस्ट के लिए भेजे थे, जिनमें से अभी एक की रिपोर्ट आई है, जिसमें बर्ड फ्लू(एच5एन1)पॉजीटिव पाया गया है। इससे कृषि मंत्रालय भी हरकत में आ गया है।
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व्यक्ति में वायरस की सूचना नहीं
बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद यूटी काहेल्थ डिपार्टमेंट भी सक्रिय हो गया है। मलेरिया विंग के कार्यवाहक नोडल अफसर डॉ.अनिल गर्ग ने बताया कि अभी तक किसी भी व्यक्ति में वायरस की सूचना नहीं है। फिर भी उन्होंने एहतियात बरतना आरंभ कर दिया है। बुधवार को ही वैक्सीन के ऑर्डर भेज दिए हैं। वीरवार तक जरूरी वैक्सीन पहुंच जाएंगी।

संतोष कुमार, वन सरंक्षक ने बताया कि हमने सात सैंपल भेजे थे, जिनमें से अभी एक की ही रिपोर्ट आई है। बाकी के सैंपल की रिपोर्ट आएगी तभी कुछ कहा जा सकेगा। फिलहाल हमने तैयारियां शुरू कर दी हैं। लोगों को बतखों के करीब जाने से रोका जा रहा है।

लेक पर घूम रहे चूहे

सुखना लेक पर बतखों के आसपास चूहों का भी आतंक है। जहां बतखें घूमती हैं, वहां आसपास चूहों की कई बिल बन चुकी हैं और दिनभर यहां चूहें घूमते रहते हैं। इनसे भी पक्षियों को प्लैग जैसे इन्फैक्शन का खतरा हो सकता है।  

क्या है बर्ड फ्लू वायरस
एच5एन1: यह एवियन इनफ्ल्युएंजा या बर्ड फ्लू भी कहलाता है। जून 2008 में यह चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और वियतनाम में फैला था।

मनुष्य पर प्रभाव: अन्य फ्लू जहां श्वसन प्रणाली के ऊपरी हिस्से से शुरू होते हैं, वहीं यह वायरस निचले हिस्से यानी फेफड़ों में फैलता है और वायरल निमोनिया पैदा करता है जो घातक होता है।

लक्षण: बुखार, खांसी, गले में सूजन, मासपेशियों में दर्द और जकड़न, सांस लेने में तकलीफ और जानलेवा निमोनिया। विश्व स्वास्थ्य संगन की रिपोर्ट के अनुसार मनुष्यों में एच5एन1 इनफेक्शन 60 फीसदी मामलों में मौत हो जाती है।
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कितने तरह के फ्लू

फ्लू वायरस आरएनए (राइबोन्यक्लिक एसिड) आधारित सूक्ष्म जीव शृंखला हैं, इसलिए ये परिस्थिति के अनुसार तेजी से म्युटेट होते हैं। इसके करीब एक दर्जन म्युटेट रूप सामने आ चुके हैं और पक्षियों से लेकर अन्य स्तनधारियों को भी चपेट में लेने में सक्षम हैं।

एच1एन1
1918 में यह स्पेनिश फ्लू के नाम से महामारी की तरह फेला था। अब यह सामान्य मानव फ्लू है। वर्ष 2007 में यह सूअरों से इंसान में म्युटेट (एन1एच2) होकर पहुंचा और महामारी की तरह फैला।

एच2एन2
यह भी एच1एन1 का म्यूटेशन है। 1889 में यह रशिया में फेला था। इस रशियन फ्लू भी कहा जाता है।

एच3एन2
यह पक्षियों के साथ-साथ मनुष्य और जानवरों में भी फैल सकता है। इसे हांगकां फ्लू के नाम से जाना जाता है और अमेरिका में हर साल 36 हजार लोगों की मौत इस फ्लू से होती है।

एच7एन7
यह पक्षियों के अलावा मनुष्य, सूअरों, सील, घोड़ों और अन्य स्तनधारियों में फैल सकता है। वर्ष 2003 में नीदरलैंड में इससे 89 लोगों की मौत हुई।

एच9एन2
चीन और वियतनाम में यह बतखों में फैला। 1997 और दिसंबर 2009 में बाजार में बतखों के मीट के सैंपल में भी यह वायरस मिलने से दुनिया में हड़कंप मच गया था और चीन और वियतनाम से पोल्ट्री निर्यात रोकना पड़ा था।
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