एसई छात्रों के दाखिले दिखाकर यूनिवर्सिटी ने करीब 500 छात्रों के नाम पर 5 करोड़ 726 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया। विजिलेंस जांच में यह सामने आया है कि दलालों के जरिए पूरा खेल होता था। दलालों को एक एडमिशन लाने पर प्रति छात्र 3 हजार रुपये कमीशन दिया जाता था। दलाल छात्रों के राशन कार्ड और शपथ पत्र लाकर यूनिवर्सिटी में जमा करवाते और दाखिला हो जाता।
इस तरह 500 से ज्यादा ऐसे छात्र पाए गए जिनके दूसरे जगह भी दाखिले चल रहे थे। इन छात्रों के शपथ पत्र और राशन कार्ड के आधार पर बैंक अकाउंट खुलवाकर उनमें छात्रवृत्ति की राशि डलवा दी गई। इसके बाद बिना किसी अनुमति के इसी राशि को अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिया। दलाल विद्यार्थियों को डिग्री करवाने का लालच देकर उनसे राशन कार्ड और आधार कार्ड व शपथ पत्र ले लेते थे।
पहले यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर साधना राय थी जोकि 12वीं पास थी। इसके बाद जब केस दर्ज हुआ तो उनके पति विनय राय उन्हें हटाकर वीसी बन गए। एडमिशन के लिए जो शपथ पत्र लिए गए थे उन्हीं से एसई विद्यार्थियों के पहले खाते खुलवाए गए। फिर उनमें सरकारी राशि डलवाई गई और फिर वह राशि यूनिवर्सिटी के खाते में ट्रांसफर करवाकर सरकार को चपत लगाई गई। सुरेश कौशिक, एसपी विजिलेंस।