जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के मामले में सवालों के घेरे में आए अफसरों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। एक ओर जाट आरक्षण आंदोलन की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट को लेकर सियासी पारा गरम है, तो दूसरी तरफ गृह विभाग ने कमेटी की ओर से सवालों के घेरे में लाए गए अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
हरियाणा में फरवरी माह में आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं के बीच अफसरों की भूमिका की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट में कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, जिनमें शामिल 17 अधिकारियों को गृह विभाग ने अब सुनवाई का मौका दिया है। इनमें 12 डीएसपी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। जबकि पांच आईपीएस अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी कमेटी ने सवाल उठाए थे।
सुनवाई के लिए जांच अधिकारी की नियुक्ति होगी
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गृह विभाग इन मामलों पर सुनवाई के लिए जल्द जांच अधिकारी भी नियुक्त करेगा। गृह सचिव रामनिवास ने एक सवाल के जवाब में बताया कि 12 डीएसपी और पांच आईपीएस जिन्हें आरक्षण आंदोलन के दौरान लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया था, उन्हें नोटिस भेजे गए थे। इनके जवाब मिल चुके हैं, जिसके अध्ययन के बाद उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा।
गृह सचिव ने कहा कि इसके लिए जांच अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे, ताकि गुण-दोष का सही मायने में आकलन हो सके। इसके बाद ही इस मामले में आगे की कोई कार्रवाई होगी। गृह सचिव ने बताया कि सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही केाई निर्णय लिया जाएगा। आरक्षण आंदोलन के दौरान जिन पुलिस कर्मियों पर सवाल उठाए गए थे, उन पर पहले ही डीजीपी की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।