आईएएस अशोक खेमका और आईएएस संजीव वर्मा।
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हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दर्ज मामले में बड़ी राहत मिली है। प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ जांच की मंजूरी देने से मना कर दिया है। पंचकूला पुलिस को भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने से पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी था। पुलिस ने ऐसा न कर केस दर्ज करने के बाद जांच की घटनोत्तर स्वीकृति मांगी, जिसे सरकार ने देने से इनकार कर दिया है।
भ्रष्टाचार के मामले में अब खेमका के खिलाफ तो जांच नहीं होगी, मगर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले आईएएस संजीव वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ खेमका की तरफ से उत्पीड़न और अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए मामले की जांच पुलिस करेगी। वर्मा ने हरियाणा भंडारण निगम में 12 साल पहले हुई भर्तियों के मामले में भ्रष्टाचार उजागर कर खेमका के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की शिकायत पंचकूला पुलिस को दी थी।
पुलिस ने जल्दबाजी करते हुए सरकार से बिना मंजूरी लिए ही प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा-13 के तहत मामला दर्ज कर लिया। यह नियमों के विरुद्ध था। आईएएस अफसर के खिलाफ केस दर्ज करने से पहले मंजूरी लेना जरूरी था, पुलिस के ऐसा न करने पर खेमका ने मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतिकरण देकर अपना पक्ष रखा। यही उन्हें राहत मिलने का आधार बना।
इससे पहले गृह मंत्री अनिल विज भी अशोक खेमका के खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर चुके थे। उन्होंने भी साफ कहा कि केस दर्ज करने से पहले मंजूरी क्यों नहीं ली। गृह मंत्री ने संजीव वर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में जांच आगे बढ़ाने की मंजूरी दी हुई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खेमका से जुड़े मामले की फाइल मुख्य सचिव के जरिये अंतिम निर्णय के लिए अपने पास मंगवाई थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने महाधिवक्ता की राय के बाद अंतिम निर्णय लिया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 नवंबर 2019 को यशवंत सिन्हा बनाम सीबीआई के फैसले का आधार बनाया गया है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने से पूर्व राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी है।