चंडीगढ़। कैंसर मरीजों को पीजीआई ने बड़ी राहत दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में आयोजित पीजीआई नियामक मंडल की बैठक में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए एक अलग डिपार्टमेंट बनाने की मंजूरी दी गई है। इससे मरीजों को अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बाद मरीज डिपार्टमेंट में जाकर इलाज करा सकेंगे।
पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने बताया कि इस पूरे रीजन में कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक अलग डिपार्टमेंट की जरूरत महसूस की जा रही थी। संस्थान की पहली प्राथमिकता भी यही थी कि कैंसर मरीजों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द इलाज मुहैया करवाया जाए। अभी इस डिपार्टमेंट को हीप्टोलॉजी-आंकोलॉजी के साथ शुरू किया जा रहा है। भविष्य में आंकोलॉजी को एक अलग डिपार्टमेंट बनाने पर भी विचार किया जाएगा। बैठक में सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट को भी मंजूरी दी गई है। हालांकि, यह डिपार्टमेंट पिछले छह महीने से संचालित हो रहा है। इसके अलावा बैठक में 150 से अधिक डाक्टरों के प्रमोशन को भी मंजूरी दी गई है। कोरोना की वजह से यह बैठक दो साल बाद हुई थी। बैठक नहीं होने से कई प्रस्ताव लटके हुए थे। बैठक में 50 प्रस्ताव शामिल किए गए थे, जिनमें से कई को मंजूरी मिल चुकी है।
अलग डिपार्टमेंट बनने ये होगा फायदा
मौजूदा समय में कैंसर के मरीज पीजीआई में अलग-अलग डिपार्टमेंट में देखे जा रहे थे। कोई भी ऐसा डिपार्टमेंट नहीं था, जो सिर्फ कैंसर मरीजों के लिए हो। आंकोलॉजी व हेम्टोलॉजी मेडिसिन डिपार्टमेंट के अंतर्गत संचालित हो रहे थे। ऐसे में दिक्कत यह आती थी कि जब कोई कैंसर मरीज पीजीआई आता था तो उसे पता ही नहीं चलता था कि उसे जाना कहां। भटकते-भटकते वह मेडिसिन में पहुंचता था। जब तक डॉक्टर मरीज को समझ पाता, तब तक मरीज का एक महीना समय सिर्फ चक्कर लगाते गुजर जाता था। कई मरीज तो दो महीने बाद कैंसर के डॉक्टर के पास पहुंचते थे। ऐसे में उनका मर्ज नासूर बन जाता था, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाता था। अलग से डिपार्टमेंट बनने से अब मरीज सीधे डिपार्टमेंट के पास तो जा सकेंगे। डिपार्टमेंट बनने के साथ इलाज के लिए बेड, स्टाफ व फेकल्टी की संख्या भी बढ़ेगी।
एम्स में 30 साल पहले बन चुका है डिपार्टमेंट
पीजीआई में भले ही अब इस डिपार्टमेंट को मंजूरी दी गई है, लेकिन दिल्ली एम्स में यह तीस साल पहले बन चुका है। यहां तक जो नए एम्स बने हैं, उसमें भी कैंसर के लिए आंकोलॉजी डिपार्टमेंट बनाए जा चुके हैं, जबकि इस रीजन में कैंसर के लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। पीजीआई निदेशक ने इस बात को समझा और इसे प्राथमिकता के तौर पर आगे बढ़ाया। डिपार्टमेंट बनने से शोध और इलाज के इनोवेशन पर भी काम होगा, जो मरीज के लिए तो फायदेमंद होगा और संस्थान को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।