चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीयू प्रशासन विभागों को मर्ज नहीं कर पाया है। इस साल भी इसके आसार नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि पीयू के पास कामों का ढेर लगा है। जैसे ही लॉकडाउन खुलेगा तो मानिए दिसंबर तक पीयू के पास सांस लेने तक की फुर्सत नहीं है। विद्यार्थियों का कोर्स पूरा कराने से लेकर एग्जाम व रिजल्ट जारी करने की बड़ी चुनौती है।
इसके अलावा नए दाखिले भी समय पर पूरे करने होंगे। इसके अलावा छात्रसंघ व सीनेट के चुनाव होंगे। साथ ही सिंडिकेट चुनाव भी साल के आखिरी माह में होंगे। इसी के साथ फिर सेमेस्टर एग्जाम भी करवाने होंगे। इस तरह कामों की लिस्ट तो बहुत है, लेकिन पीयू को इन्हीं कामों के बीच से समय निकालकर विभागों के मर्ज की प्रक्रिया को भी पूरा करना चाहिए ताकि नैक की ग्रेडिंग बेहतर आ पाए।
नेक की टीम ने दौरा कर दिया था सुझाव
वर्ष 2015 में नैक की टीम ने पीयू का दौरा किया था। उसी दौरान पीयू में छोटे-छोटे विभाग पाए गए थे। पीयू के कागजों में यह विभाग नहीं थे बल्कि यह सेंटर हैं, जिनका संचालन समन्वयक कर रहे हैं, लेकिन यहां विभाग अध्यक्ष बना दिए गए। नैक का सुझाव था कि छोटे-छोटे विभागों को संबंधित विभागों के साथ जोड़कर एक छत के नीचे लाने का काम करें।
इसके कई फायदे नैक की टीम ने गिनाए। टीम के जाने के बाद पीयू में एक कमेटी बनी और इस पर काम शुरू हुआ लेकिन बैठक एक ही हो पाई। विरोध भी इसका हुआ लेकिन बात नहीं बन पाई। पिछले साल दो बार बैठकें हुईं लेकिन तब भी प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। क्योंकि पीयू ने उर्दू को फॉरेंन लैंग्वेज की सूची में डाल दिया। इसी के विवाद उत्पन्न हुआ और प्रस्ताव टाल दिया।
चार साल बीत गए, नहीं हो पाया निर्णय
चार साल से अधिक समय बीत गया, लेकिन निर्णय नहीं हो पाया। इसके लिए पीयू के उच्चाधिकारियों को इच्छाशक्ति दिखानी होगी। आगे बढ़कर काम करना होगा तभी यह हो पाएगा। विरोध से डरे तो फिर वही हाल होगा। जानकारों का कहना है कि इस बार पीयू को इस मामले में कच्चा हाथ नहीं रखना चाहिए और इस साल में इस कार्य को पूरा कर देना चाहिए।
वहीं पीयू लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहा है। क्योंकि पीयू के पास कामों की लिस्ट बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि पीयू के लिए यह काम महत्वपूर्ण है। यदि फिर से विभागों के मर्ज का काम टला तो नैक की ग्रेडिंग पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं अफसरों ने भी कहा है कि इसके लिए समय निकाला जाएगा।