जाटों को दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। कुछ याचिकाकर्ताओं ने एक अपील दायर की है। इसमें उन्होंने बेंच बदलने की अपील की। आरक्षण को चुनौती देने वाली यादव महासभा और मुरारी लाल गुप्ता ने बेंच के दोनों जजों के जटसिख होने की बात कहते हुए इस मामले को अन्य बेंच को रेफर करने की बात कही।
इन दलीलों पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मौखिक अपील पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके लिए अर्जी दाखिल की जाए। अर्जी पर सुनवाई कर उचित आदेश जारी होंगे। मंगलवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही यादव महासभा की ओर से एडवोकेट पीआर यादव ने कहा कि उनका केस किसी अन्य बेंच को रेफर किया जाए।
यादव ने कहा कि इस खंडपीठ के दोनों जज जटसिख हैं और वे इस मामले को नहीं सुन सकते हैं क्योंकि जाटों के आरक्षण को चुनौती का मामला है। जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस लीज़ा गिल की खंडपीठ ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरक्षण पर रोक लगाने वाली भी यही बेंच थी। अब जब इस मामले की सुनवाई पूरी होने वाली है और इतना समय दिया जा चुका है इस समय बेंच बदलने की मांग समझ से बाहर है।