किसान खुशहाल होगा तो ही देश खुशहाल होगा। किसान की खुशहाली में ही हर वर्ग की उन्नति छिपी है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार अमेरिका की नीति भारत में लागू करना चाहती है लेकिन सरकार को समझना चाहिए कि अमेरिका और भारत दोनों की परिस्थितियों में बहुत अंतर है।
अमेरिकी कृषि अर्थव्यवस्था का स्पष्ट नियम है कि या तो आप बड़े किसान बन जाओ या खेती छोड़ दो। अमेरिका सरकार भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा सब्सिडी अपने किसानों को देती है। भारत में छोटे किसानों की तादाद अधिक है, जिनसे लगातार सब्सिडी का लाभ छीना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ इस आंदोलन में किसान अकेला नहीं है सभी कर्मचारी, छोटे कारोबारी, ट्रांसपोर्टर्स और ट्रेड यूनियन का साथ भी किसानों को मिल रहा है। कांग्रेस पूरी मजबूती से किसानों के साथ खड़ी है। किसानों के लिए पूरे देश की एकजुटता का नमूना आज भारत बंद के दौरान भी देखने को मिला।
भारत बंद पूरी तरह सफल और शांतिपूर्ण रहा। बावजूद इसके मौजूदा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। नए कानूनों के जरिए सरकार किसान से उसकी एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडियां छीनना चाहती है। हुड्डा ने कहा कि भाजपा लगातार कांग्रेस के घोषणापत्र में एपीएमसी एक्ट खत्म करने की बात कहकर जनता को गुमराह कर रही है।
कांग्रेस के घोषणापत्र में एपीएमसी में सुधार और मंडियों के विस्तारीकरण की बात कही गई थी। यूपीए सरकार के समय एमएसपी में सालाना 13 से 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती थी, जबकि भाजपा के शासन में केवल 4 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। हुड्डा ने हरियाणा के कृषि मंत्री के आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने वाले बयान की कड़ी आलोचना की। हुड्डा ने कहा कि ऐसे बयान के लिए कृषि मंत्री को माफी मांगनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।