हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिह हुड्डा ने मुख्यमंत्री खट्टर और उनके सहयोगियों की ओर से लगाए आरोपों को खारिज करते हुए तीखा वार किया। उन्होंने कहा है कि आखिर बगैर किसी जांच और आधार के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए उनके जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है।
हरियाणा के लोग भी सच्चाई जानना चाहते हैं कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से मामले की जांच क्यों नहीं करवा रही है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्हें पता है कि जांच के दौरान हिंसक घटनाओं की पटकथा लिखने वाले निर्माता, निर्देशक व कलाकार तक भाजपा के लोग ही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि हरियाणा के संघ प्रमुख मेजर करतार सिंह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री और सरकार आंदोलन से निपटने में विफल रही है। हुड्डा ने भाजपा सरकार से सवाल किया है कि यह कैसा राज है, जहां भड़काने वालों से सचेत करने वाले पर रोजद्रोह का केस बने और समाज में जहर घोलने और आग लगाने वाले की ओर नजर तक न जाए। उन्होंने कहा- ‘‘हुकूमत पर्दापोशी में बहुत मशरूफ है मगर, ये धुआं कहां से उठा, बच्चा-बच्चा जानता है।’
साजिश के लिए कांग्रेसी विधायकों को सदन आने से रोका
हुड्डा ने कहा है कि ऐसा पहली बार देखने में आया है कि जब विधानसभा के नियमों की अनदेखी की गई। इसके तहत विधायकों को छह माह के लिए सदन में आने से रोक दिया गया। उन्हें 12 महीने तक के लिए विधानसभा के किसी कमेटी के सदस्य के रूप में मीटिंग में हिस्सा लेने से वंचित कर दिया गया है।
जाहिर है कि भाजपा की साजिश कांग्रेसी विधायकों को सदन में आने से रोकना था, ताकि किसी बहस में उन्हें हिस्सा लेने का मौका न मिले। सरकार की विफलताओं को सदन में भी उठाने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई, जिसमें इनेलो ने भी सरकार से हाथ मिला लिए हैं। कांग्रेसी विधायकों को मजबूरन विधानसभा भवन के बाहर समानांतर सदन चलाना पड़ा।
तीन अप्रैल को आदमपुर में होगा सद्भावना सम्मेलन
हुड्डा ने कहा कि भाजपा को हरियाणा में धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की संभावना नहीं दिखाई दी तो जातीय सद्भाव बिगाड़ने का खेल रचा गया, ताकि जातीय आधार पर एक नया वोट बैंक खड़ा कर सकें, लेकिन यह मंसूबा पूरा नहीं होगा।
कांग्रेस जल्द भाजपा के छिपे हुए एजेंडे को जनता के सामने उजागर कर, समाज में फिर से भाईचारा कायम करेगी। इसी सिलसिले में तीन अप्रैल को आदमपुर में सद्भावना सम्मेलन होगा। जबकि 10 अप्रैल को फरीदाबाद में पांच जिलों (पलवल, मेवात, रेवाड़ी, गुड़गांव व फरीदाबाद) के कार्यकर्ताओं का सद्भावना सम्मेलन होगा।