अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि भाजपा की अंदरूनी कलह जनता की जान पर भारी पड़ रही है। मुख्यमंत्री और गृह व स्वास्थ्य मंत्री के बीच टकराव के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। डॉक्टर एक बार फिर हड़ताल पर जाने की बात कर रहे हैं और मरीजों को अस्पतालों में दवाइयां तक उपलब्ध होना मुश्किल हो गया है। पिछले 66 से अधिक दिनों से जारी आपसी खींचतान में बेगुनाह जनता पिस रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का पहले ही दिवालिया पिटा हुआ है, लेकिन गृहमंत्री व मुख्यमंत्री दोनों आंख बंद करके बैठे हैं। कांग्रेस विधानसभा के भीतर इस मुद्दे को उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।
हुड्डा ने कहा कि अस्पतालों में मरीज तो खरीद केंद्रों पर किसान खाद की बाट जोह रहे हैं। पहले से ही किसान मौसमी मार के चलते हुए नुकसान का मुआवजा लेने के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं। उधर, गन्ना किसान अपनी पेमेंट, आढ़ती और मजदूर अपने बकाया के इंतजार में बैठे हैं। प्रदेश के युवा नई भर्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं। हुड्डा ने कहा कि अगर भाजपा-जजपा सरकार चलाने में नाकाम हैं तो उन्हें विधानसभा भंग करके तुरंत चुनाव करवा देने चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला उम्मीद के अनुसार
अनुच्छेद 370 को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उम्मीद के अनुसार है। अनुच्छेद 370 साल 1964 में ही महत्वहीन हो गया था। भारत का हिस्सा बन गया था और 1964 के बाद ही जम्मू कश्मीर में सड़कें और राष्ट्रीय राजमार्ग बनने लगे थे। असली मुद्दा जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का है और सरकार को जम्मू की विधानसभा बहाल कर तुरंत चुनाव करवाने चाहिए।