भ्रष्टाचार पर प्रहार : हरियाणा सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को दी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां विभाग के चार अधिकारियों के 20 बैंक खातों और उनकी पांच प्रॉपर्टी अटैच करने की अनुमति दे दी है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रदेश के मुख्य सचिव से इस संबंध में अनुमति मांगी थी। बताया जा रहा है कि हरियाणा में यह पहला मामला है जब भ्रष्टाचारी अधिकारियों की प्रॉपर्टी को अटैच किया जाएगा।
जिन अधिकारियों की प्रॉपर्टी अटैच होगी उनमें तत्कालीन एआरसीएस रेवाड़ी और जीएम आईसीडीपी रेवाड़ी अनु कौशिक, एआरसीएस फरीदाबाद रामकुमार, तत्कालीन डेवलपमेंट आफिसर नितिन शर्मा और योगेंद्र अग्रवाल के नाम शामिल हैं। एसीबी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चारों आरोपियों ने अलग अलग शहरों में गबन की राशि से फ्लैट और प्लाॅट खरीदे हैं। एसीबी की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार ने ब्यूरो को इन अधिकारियों और उनके सहयोगियों के बैंक खाते फ्रीज करने और प्रॉपर्टी अटैच करने की अनुमति दी है। अब एसीबी आगे की कार्रवाई को अंजाम देगी। मई माह में गबन सामने आने के बाद आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।
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22 करोड़ की राशि आई, कर ली बंदरबांट
सहकारिता विभाग से संबंधित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आइसीडीपी) विंग में केंद्र सरकार से मिली 22 करोड़ रुपये सहायता राशि की अधिकारियों व कर्मचारियों ने बंदरबांट का मामला है। कई महीनों की जांच के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आइसीडीपी विंग की सहायक रजिस्ट्रार एवं महाप्रबंधक अनु कौशिक को इस मामले में गिरफ्तार किया था। उनके बैंक खाते से 1.30 करोड़ रुपये मिले थे। एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आइसीडीपी) विंग सहकारिता के क्षेत्र से जुड़ा है। मुख्य तौर पर यह विंग केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित करता है। वर्ष 2018 से 2022 तक आइसीडीपी विंग के पास केंद्र सरकार से रेवाड़ी जिले के लिए 22 करोड़ रुपये सहायता राशि आई थी। अधिकारियों ने मिलीभगत करके गबन को अंजाम दिया था।