अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को बुलाने की प्रक्रिया फरवरी में शुरू कर दी गई थी। यह बड़े विश्वविद्यालय हैं, जिनकी रैंकिंग अच्छी है। इन विश्वविद्यालयों का मानना है कि कब तक कैंपस के ताले लगे रहेंगे। कोरोना के बचाव के साथ व्यवस्था को पटरी पर लाना होगा। इसी तरह पीयू को भी सोचना चाहिए। विद्यार्थियों को दूर रखने से कार्य लंबित होते हैं, न कि आसान। जानकारों का कहना है कि बड़े विश्वविद्यालयों से ही पीयू को सीख लेनी चाहिए। कम से कम अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को तो अब तक बुला लेना चाहिए था।
क्या कहते हैं छात्र नेता
एबीवीपी के मीडिया प्रभारी शुभम का कहना है कि देश के तमाम विश्वविद्यालय खुल गए हैं, लेकिन पीयू प्रशासन सोया हुआ है। कोरोना के नाम पर अधिक दिन तक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय नहीं डरा पाएगा। एहतियात के साथ शिक्षण कार्य शुरू कर देना चाहिए। ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावी नहीं है। विद्यार्थियों को भविष्य को लेकर चिंता है, लेकिन पीयू को नहीं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय खुल गए हैं। पीयू को इनसे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एबीवीपी इसको लेकर प्रदर्शन कर रही है जो जारी रहेगा।
एनएसयूआई के अध्यक्ष निखिल नरमेटा, आयुष आदि का कहना है कि विश्वविद्यालय अब खोला जाना चाहिए। पीयू के छात्र संगठनों ने सार्वजनिक रूप से एक मंच पर आकर भी प्रदर्शन किया है। हालांकि पीयू की ओर से योजना बनाई जा रही है, लेकिन अभी किसी प्रकार की कोई घोषणा नहीं की गई है।