अटल जी का चंडीगढ़ से काफी लगाव था। अक्सर पार्टी का प्रदर्शन यहां ठीक रहता था मगर जब भी कम वोट पड़ते थे तो उनका सीधा सवाल होता, ‘क्यों भई चंडीगढ़ वाले नाराज क्यों हैं?’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न मिलने पर चंडीगढ़ के भाजपा नेताओं ने खुशी जताई है।
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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पुरषोत्तम महाजन ने कहा कि वे कई बार वाजपेयी से मिले। वे बेहद खुशमिजाज व्यक्ति हैं। पंचायत समिति के चेयरमैन व भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिंगारा सिंह के अनुसार गांवों में लाल डोरे के बाहर बने मकान उन्हीं के कारण नहीं टूटे।
जब गांवों में लाल डोरे के बाहर बने मकानों को तोड़ने के नोटिस आ रहे थे तो वे ये समस्या लेकर वाजपेयी से मिले। उस समय वाजपेयी चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन आए हुए थे। वाजपेयी ने बस इतना ही कहा कि सरकार का काम मकान बनवाना है, तोड़ना नहीं।
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सभी को साथ लेकर चलते थे अटल जी
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल गुप्ता ने बताया कि वाजपेयी सभी
नेताओं व कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलते थे। वे हमेशा आपसी राजनीति से दूर
रहने की बात करते थे।
गुप्ता ने बताया कि वे 1999 में लोकसभा चुनाव के
दौरान वाजपेयी से सेक्टर-17 परेड ग्राउंड में मिले थे। वाजपेयी से हुई
मुलाकात आज भी उन्हें याद है।
चंडीगढ़- लुधियाना रेल प्रोजेक्ट को गति दी पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने कहा कि वाजपेयी कम शब्दों में गंभीर बात कह देते हैं। चंडीगढ़-लुधियाना रेल लाइन का प्रोजेक्ट कई वर्षों से लटका हुआ था। उन्होंने इस संबंध में वाजपेयी से एक बार ही बात की थी। उसी के बाद ये प्रोजेक्ट शुरू हो गया था
15 साल से संभाल रखे हैं ऑटोग्राफ भाजपा की कार्यकारी सदस्य नीना तिवारी ने पिछले 15 सालों से वाजपेयी के ऑटोग्राफ संभाल रखे हैं। तिवारी ने बताया कि वाजपेयी 1999 में चंडीगढ़ आए थे। उस दौरान पंजाब राजभवन में वे वाजपेयी से मिलीं। वे उस समय भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष थीं।
अपनों का हमेशा रखते हैं ख्याल अटल जी
अटल जी अपनों के काम के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। बात तब की है जब मैं केंद्रीय उड्डयन मंत्री था। अटलजी के एक मित्र अमेरिका के न्यूयार्क में इलाज के लिए गए थे। उनका एयरटिकट का डेट एक्सपायर हो गया। अटल जी ने मुझे फोन कर मदद करने को कहा। मैंने अपने पीए को बता दिया।
इसके बाद अटल जी का फोन पांच दिन के बाद फिर आया और पूछा कि काम हुआ कि नहीं तो मैंने फिर जानकारी ली तो पता चला कि अटल जी के डाक्टर मित्र न्यूयार्क से कहीं बाहर गए थे। फिर उनसे संपर्क कर एयरटिकट की डेट एक्सटेंड कराकर अटल जी को फोन पर सूचना दी तो धन्यवाद दिया।
वे अपनों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उन्हें भारत रत्न मिलने पर मुझे बेहद खुशी है। उन्हें इस सम्मान से पहले ही सम्मानित किया जाना चाहिए था। मैं बेहद खुश हूं। -हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता।
अटल जी को बहुत पसंद आता था हिसार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने के भारत सरकार के ऐलान से उकलाना निवासी एवं भाजपा अंत्योदय योजना के प्रदेश प्रमुख श्रीनिवास गोयल ने इस निर्णय पर राष्ट्रपति का आभार जताते हुए बताया कि यह सम्मान 10 वर्ष पहले ही वाजपेयी को दे दिया जाना चाहिए था।
श्रीनिवास गोयल भाजपा की उन हस्तियों में से एक है, जिनको वाजपेयी का दो बार मेजबान बनने का मौका मिला है। एक बार तब जब सन् 1991 के लोकसभा चुनाव में अटल जी ने श्रीनिवास को हिसार लोकसभा सीट से टिकट अलाट की। उनके समर्थन में हिसार में एक जनसभा को संबोधित किया और दूसरा मौका तब मिला, जब सन् 1998 में अटल जी प्रधानमंत्री थे।
लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी हंसराज स्वान के समर्थन में फतेहाबाद आए थे, तब श्रीनिवास गोयल ने प्रभारी होने के नाते मेजबान की भूमिका अदा की थी।
पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को केंद्र सरकार ने उनके जन्मदिन के तोहफे के तौर पर भारत रत्न से नवाजे जाने की घोषणा की है। अटल बिहारी का कई बार रोहतक भी आना हुआ है। यहां दिवंगत लाला हुकम चंद गोयल और उनके परिवार से अटल बिहारी का गहरा लगाव रहा है।
हुकम चंद गोयल के बेटे सुनील ने पिछली कुछ यादों को ताजा करते हुए बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी जब भी यहां आते तो ज्यादातर उन्हीं के यहां ठहरते। उनका परिवार 1955 में परस मोहल्ला में रहता था तो उन दिनों भिवानी स्टैंड पर एक जनसभा होनी थी, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को संबोधित करना था लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी किन्हीं कारणों से रोहतक नहीं आ पाए तो अटल बिहारी वाजपेयी उनका संदेश लेकर पहली बार रोहतक आए और हुकम चंद गोयल के यहां ठहरे।
जहां तक खाने की बात है तो अटल बिहारी के लिए घर की बनी सभी डिश स्पेशल होती थी। उनके आने पर कभी भी घर में कोई स्पेशल डिश नहीं बनी। एक बार सर्दियों में जब वे आए तो घर में बाजरे की खिचड़ी, बाजरे की रोटी और साग बना था। घर में सभी ने यही खाना खाया और उन्होंने भी। कभी भी बाजार से खाने को नहीं मंगाया गया। सुनील ने बताया कि वाजपेयी का कई बार यहां आना हुआ।
करीब 15 साल पहले जब पुलिस लाइन मैदान में तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जनसभा को संबोधित करना था। वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी उन दिनों हरियाणा के प्रभारी थे और उसके पिता हुकम चंद गोयल प्रदेश उपाध्यक्ष। प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को रिसीव करने के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय ने हुकम चंद गोयल की ही ड्यूटी लगाई क्योंकि प्रधान मंत्री वाजपेयी यहां हुकम चंद को ही पहचानते थे।
पुलिस लाइन मैदान में जनसभा चल रही थी तो अचानक प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी को दिल्ली के अशोका रोड़ स्थित भाजपा कार्यालय की ओर प्रस्थान करने को कहा। तभी हुकम चंद गोयल का पोता सिद्धांत नरेंद्र मोदी को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी का हमारे परिवार से अच्छा रिश्ता रहा है।