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भारत भूषण को दूरदर्शन पर खुद की फिल्में देखना था पसंद

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चंडीगढ़। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि अपने पिता भारत भूषण की जिंदगी को बहुत करीब से देखा है। वे अंतर्मुखी स्वभाव के थे और उन्हें कला से बहुत जुड़ाव था। वे कभी भी पार्टी आदि में नहीं जाते थे। अपनी ही छोटी और प्यारी दुनिया में खुश रहते थे। उन्हें दूरदर्शन पर खुद की फिल्में देखने का बहुत पसंद था। ये सब किस्से रविवार को ऑनलाइन कार्यक्रम काव्यांजलि में भारत भूषण की बेटी अपराजिता साझा कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि जिंदगी में सहजता और सरलता आदि गुणों को उन्हीं से सीखा। वे कभी नहीं चाहते थे कि मैं फिल्मों की दुनिया में आऊं। वे चाहते थे कि मैं डॉक्टर या प्रोफेसर जैसी कोई नौकरी करूं। स्कूल के बाद जब उन्होंने करिअर को लेकर सवाल पूछे तो मैंने कह दिया कि मैं फिल्म इंस्टीट्यूट जाना चाहती हूं। उन्होंने इसके लिए मना कर दिया।
उन्होंने कहा कि डिग्री के बाद मुझे संयोगवश रामायण नाटक में मंदोदरी का किरदार मिल गया और ये मेरा पहला ऑनस्क्रीन काम था। जब मैंने एक सुबह फोन किया और पूछा कि आपने सुबह दूरदर्शन पर रामायण देखा। तब उन्होंने गर्व से और चकित होकर कहा कि तुम एक्टिंग भी कर लेती हो?
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अपराजिता ने बताया कि पिता काफी मुझे जिंदगी में एक खेद रहेगा कि मुझे उनकी किताबें और म्यूजिक कलेक्शन नहीं मिला। उनके पास नाटक, उपन्यास, कविताओं पर आधारित बहुत सी किताबें थीं। उन्होंने बचपन से मुझे किताबों के साथ बड़ा किया। वो अक्सर मुझे उपन्यास पढ़ाते थे, जब कविता पढ़नी होती थी तो अमृता प्रीतम की किताब पढ़ने के लिए देते थे। वे बहुत ही प्यार करने वाले और साथ में सख्त पिता थे। कई बार हमें किसी काम के लिए मना कर देते थे तो उस पर अडिग रहते थे।
खाली समय फोटोग्राफी और गार्डनिंग में करते थे व्यतीत
अपराजिता ने बताया कि पिताजी को कला और प्रकृति से बहुत जुड़ाव था। पिता जी के पास जितने बंगले रहे, उन्होंने सब में बड़े-बड़े गार्डन बनाए हुए थे। उन्होंने अपने कमरे के बाहर रात की रानी लगाना बहुत पसंद था। जिस दिन शूटिंग नहीं होती थी, वे खुद निजी तौर पर पौधों को पानी देते थे और उनकी निगरानी करते थे। इसके अलावा उनके पास बहुत तरह के कैमरे थे। वे अक्सर समय मिलते ही पहाड़ों पर फोटोग्राफी के लिए निकल पड़ते थे और आदिवासी लोगों पर शूट करते थे और घर आकर कई बार एडिट भी करते थे। छुट्टी के दिन हम दोनों बहनों को चिड़ियाघर या बीच पर लेकर जाना और हमारी ढ़ेरों फोटो खींचना उनका शौक था।
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