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SGPC चुनावः भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल के सिर दूसरी बार सजा प्रधान का ताज

Wed, 14 Nov 2018 09:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल
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भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल लगातार दूसरी बार सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान चुन लिए गए हैं। एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुंद्री हाल में मंगलवार को आयोजित साधारण सभा की बैठक में बीबी जागीर कौर ने लौंगोवाल का नाम अध्यक्ष पद के लिए पेश किया। पूर्व अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ और अलविंदर पाल सिंह पखोके ने उनके नाम का अनुमोदन किया। 

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उपस्थित एसजीपीसी सदस्यों ने एकसुर में नाम पर अपनी स्वीकृति दे दी। कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर रघुजीत सिंह विर्क, कनिष्ठ उपाध्यक्ष बिकर सिंह चन्नोजी और महासचिव पद पर गुरबचन सिंह करमोवाल को सर्वसम्मति से चुन लिया गया। कार्यकारिणी में गुरमीत सिंह तरलोकेवाल, बाबा भूपिंदर सिंह, जरनैल सिंह करतारपुर, खुशमिंदर सिंह भाटिया, जगजीत सिंह तलवंडी, मास्टर अमरीक सिंह विछोहा, बीबी जसबीर कौर जफरवाल, शिंगारा सिंह लोहियां, जत्थेदार तारा सिंह सल्ला, अमरीक सिंह कोट शमीर और मंजीत सिंह को सर्वसम्मति से चुना गया। विरोधी गुट के सदस्यों की गैरहाजिरी के कारण पहली बार विरोध पक्ष का कोई भी सदस्य कार्यकारिणी में शामिल नहीं हो सका।
 

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भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल
इससे पहले एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह ने साधारण सभा की कार्रवाई शुरू की। पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने चुनाव प्रक्रिया शुरू करवाई। साधारण सभा की बैठक शुरू होने से पहले श्री हरमंदिर साहिब के अरदासिया ने अरदास की। मुख्य वाक श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह ने लिया। बैठक में साधारण सभा के 185 में से 148 सदस्य उपस्थित थे। विरोधी गुट के 26 सदस्य गैरहाजिर रहे। नौ सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है और दो सदस्य पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। 

बलविंदर बैंस और महिंदर सिंह ने किया बैठक का बायकाट
अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले विधायक और एसजीपीसी सदस्य बलविंदर सिंह बैंस और मोहिंदर सिंह ने विरोध शुरू कर दिया। शोर के बीच गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने शोक प्रस्ताव पढ़ने शुरू कर दिए। दोनों एसजीपीसी सदस्यों ने शोर मचाकर विघ्न डालने की कोशिश की। बाद में बलविंदर सिंह बैंस श्री गुरु ग्रंथ साहिब के हत्यारों को सजा मिले के नारे लगाते हुए वॉकआउट कर गए।

कोई भी विरोधी सुर नहीं उभरा  
लगभग डेढ़ दशक के बाद एसजीपीसी प्रधान के चुनाव में कोई भी विरोधी सुर सुनाई नहीं दिए। बादल विरोधी सदस्य चुनावी प्रक्रिया में गैरहाजिर रहे। पूर्व महासचिव और बादल विरोधी सुखदेव सिंह भौर भी बैठक में नहीं आए।
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