गोमाता चारा कोष बनाने के लिए आयोजित कथा के दूसरे दिन कथावाचक रविनंदन शास्त्री ने प्रवचनों की अमृतवर्षा की। शास्त्री ने कहा कि भगवान से धन संपति क्यों मांगते हो। यदि मांगना ही है तो वैराग्य मांगों। अपने प्यारों की संग मांगों।
उन्होंने कहा कि भगवान से कुछ मांगने वाली चीज है तो वह है सत्संग। भक्ति बड़ी कीमती है। सत्संग ही बड़ी तिजोरी है। उन्होंने कहा कि कथा तमाशा नहीं है यह भक्ति है।
रविनंदन शास्त्री ने उपस्थित लोगों को कहा कि यदि सत्संग में नहीं आ पाते हो तो घर में ही ग्रंथों का अध्ययन करो। भगवान तो भक्तों से मिलने के बहाने राक्षशों का नाश करने आते हैं। कथा का अयोजन गो सेवा मिशन करा रही है।
इस अवसर पर गो सेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णानंद, श्री कृष्ण भक्ति आश्रम मंडल के अध्यक्ष राकेश पाल मोदगिल सहित काफी संख्या में भक्त उपस्थित हुए। कथा के बाद भव्य आरती की गई और उपस्थित भक्तों को प्रसाद बांटे गए।