अपने संबोधन में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सुझाव दिया कि विधायकों के ग्रुप बनाकर उन्हें कानूनी सहायकों की सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कदम से विधायकों को अपने सरोकार सदन में पेश करने के लिए आवश्यक दस्तावेज या अन्य संबंधित जानकारी जल्द से जल्द मिल सकेगी। बाजवा ने विधानसभा स्पीकर की तरफ से यह सत्र करवाए जाने की तारीफ करते हुए सदन में रचनात्मक कार्यों की वकालत की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष में तालमेल बहुत जरूरी है, इसे बनाकर रखना चाहिए। उन्होंने अफसरशाही पर तंज करते हुए कहा कि कई अधिकारी कोशिश करते हैं कि उनके मंत्री को सही बात का पता नहीं न लगे अन्यथा अहमियत कम हो जाएगी।
बाजवा ने इस मौके पर मुख्यमंत्री से अपील की जल्दी विधानसभा सत्र का एलान किया जाए ताकि लोगों के मुद्दों पर विचार हो सके और यह सत्र कम से कम 15 दिन का हो। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर का मानना था कि देश की संसद 100 दिन चलनी चाहिए। इसी तरह राज्यों में 40-42 बैठकें होनी चाहिए थी और अब पंजाब में यह घटकर 8-10 दिन रह गई है।
ट्रेनिंग में हिस्सा लेने नहीं पहुंचा विपक्ष
पंजाब विधानसभा में विधायकों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम के मंगलवार सुबह उद्घाटन सत्र में जहां सभी राजनीतिक दलों के विधायक मौजूद रहे, वहीं शाम को महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (मगसीपा) में शुरू हुई विधायकों की ट्रेनिंग के समय विपक्ष के अधिकांश विधायक गैरहाजिर रहे। इतना ही नहीं, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के कुल 92 विधायकों में से भी केवल 86 ही विधानसभा स्पीकर की क्लास में उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि विधायकों को विधानसभा सत्र के दौरान कामकाज संबंधी कार्यप्रणाली समझाने और सिखाने के उद्देश्य से आयोजित इस दो दिवसीय ओरिंटेशन कार्यक्रम में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने सभी विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य की थी लेकिन विपक्षी दलों के केवल पांच विधायक ही क्लास में नजर आए। शिअद के तीनों विधायक गैरहाजिर रहे जबकि भाजपा के दो विधायकों में से एक और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के 18 में से केवल तीन विधायक ही उपस्थित रहे।