चंडीगढ़। सरदार भगत सिंह किताबें पढ़ने के साथ फिल्में देखने के भी काफी शाैकीन थे। चार्ली चैप्लिन की फिल्में व उनका किरदार उन्हें काफी पसंद था। फिल्में देखने के लिए भगत सिंह अपने दोस्त जयदेव गुप्ता की मदद लेते थे क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि फिल्म देख सकें। शहीद भगत सिंह पर 25 पुस्तकें लिखने वाले भगत सिंह आर्काइव्स एंड रिसर्च सेंटर के सलाहकार और पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व डीन लैंग्वेज फैकल्टी व सीनेट सदस्य प्रोफेसर चमनलाल ने बताया कि 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह और शिवराम राजगुरु ने पुलिस सहायक अधीक्षक जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या की थी। इससे पहले 16 दिसंबर को भी उन्होंने एक फिल्म देखी थी। प्रो. चमनलाल कहते हैं कि आजादी के समय हर किसी के सीने में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा फूट रहा था। भगत सिंह भी उनमें से एक थे लेकिन हास्य कलाकार चार्ली चैप्लिन की फिल्में देखकर वह खुद को शांत रखने का प्रयास करते थे। एक रोचक किस्सा बताते हुए प्रो. चमनलाल कहते हैं कि भगत सिंह अपने पास हमेशा डिक्शनरी रखते थे। एक बार उन्हें कोई फिल्म देखनी थी लेकिन जयदेव नहीं आए। अगले दिन जब वह मिले तो भगत सिंह ने जयदेव से पूछा कि कल क्यों नहीं आए। इस पर जयदेव बोले उन्हें डिस्पेप्सिया नामक बीमारी हो गई है। भगत सिंह को इस बीमारी का पता नहीं था तो उन्होंने तुरंत जेब से डिक्शनरी निकाली और पता किया। यह अपच या बदहजमी की बीमारी थी। भगत सिंह समझ गए और जयदेव की पीठ पर घूंसा मारते हुए कहा कि फिल्म देखने से बचने का यह बहाना आगे से नहीं चलेगा।
दूध पीने और नाैका विहार भी बेहद पसंद था शहीद-ए-आजम को : प्रो. चमनलाल ने बताया कि भगत सिंह खाने-पीने के बहुत शाैकीन थे। मीठे में रसगुल्ला उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था। जब उन्हें रसगुल्ला खाने का मन होता तो वह अपने दोस्तों को भी साथ ले जाया करते थे। क्रांतिकारी सुशीला देवी जब भी भगत सिंह से मिला करती थीं तो उनके लिए संतरे व रसगुल्ले ले जाया करती थीं। संतरे भी उन्हें काफी पसंद थे। प्रो. चमनलाल कहते हैं कि दूध भी उन्हें बेहद पसंद था। एक बार भगत सिंह ने एक ग्वाले को सड़क किनारे भैंस का दूध निकालते देखा। वह उसके पास गए और पूछा कि एक बाल्टी दूध कितने का है। ग्वाले ने एक रुपये की मांग की। उन्होंने तुरंत जेब से एक रुपया निकाला और ग्वाले के हवाले करते हुए दूध से भरी बाल्टी उठाई और पूरा दूध गटक गए। इसके अलावा उन्हें नाैका विहार का भी काफी शाैक था। लाहाैर में वह रावी नदी में पूरी रात दोस्तों के साथ नाैका विहार करते थे। जब वह कुछ समय के लिए कानपुर में रुके थे तब वह गंगा नदी में नाैका विहार करते थे।