मसौल की तरफ जाने वाला रास्ता।
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बुर्ज कोटिया का झरना
चंडीगढ़ के आसपास इकलौता झरना है, जो पंचकूला में पड़ता है। चंडीगढ़ से करीब 30 किलोमीटर दूर बुर्ज कोटिया जाने के दौरान कच्चा रास्ता मिलता है। इसके एक तरफ घग्गर नदी है। इसी पर आगे जाकर झरना मिलता है। कई लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं। इस रास्ते पर सिर्फ माउंटेन बाइक जाती हैं। इसी सड़क पर आगे चलकर मुगलों के जमाने का किला बना हुआ है। यहां से पंचकूला, अमरावती व कौशल्या डैम का व्यू बहुत सुंदर दिखता है।
मसौल गांव
पीजीआई से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर मसौल गांव है। पीजीआई से नयागांव और वहां से करोरा होते हुए मसौल जा सकते हैं। मसौल पहुंचने से पहले कच्चा और पहाड़ी रास्ता है। प्रकृति के नजारों से भरे इन रास्तों पर साइकिल से जाना जीवन का एक बेहतरीन अनुभव है। मसौल से जीवाश्म मिलते रहते हैं। इन जीवाश्म पर शोध के लिए फ्रांस के कई वैज्ञानिक भी आते हैं। यहां ऐसे रास्ते हैं, जहां गाड़ियों का जाना संभव नहीं होता। ऐसे में साइकिल ही सबसे बेहतर है।
छतबीड़
इस नाम से लोगों के सामने छतबीड़ चिड़ियाघर का नजारा घूमने लगता है। एयरपोर्ट चौक से सीधे छतबीड़ के लिए रास्ता है। खेतों के बीच रास्ते से गुजरकर आगे जाने पर छतबीड़ डैम दिखाई पड़ता है। इससे पहले छतबीड़ जाने का जो रास्ता है, वहां साइकिल से जाने से एडवेंचर जैसा अहसास होता है। परिवार के साथ यहां जा सकते हैं। यहां सूर्योदय का नजारा भी जबरदस्त है।
यदि कोई साइक्लिंग करता है तो उसे इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। साइक्लिंग का ऐसा अनुभव आपको कहीं और नहीं मिल पाएगा। लेकिन जब भी इन जगहों पर जाएं तो कभी अकेले न जाएं, बल्कि ग्रुप में जाएं। यह सुरक्षा के लिहाज से सही होगा। -अक्षित पासी, वाइस प्रेसिडेंट, साइकिलगिरी
इन जगहों पर जाने से प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है। ताजी हवा मन को शांत कर शरीर को तरोताजा कर देती है। यहां पर लोगों को जाना चाहिए। लोग जाएंगे तो उन्हें साइक्लिंग के असली महत्व के बारे में पता चलेगा। -दीपकंवर सिंह, साइक्लिस्ट