सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है। वीकएंड पर घूमने का मजा भी सर्दी की शुरूआत में ही है, क्योंकि अभी हल्की-हल्की सर्दी पड़ रही है। ऐसे में अगर घूमने का मन है तो कसौली की सैर पर निकले। यह चंडीगढ़ से चंडीगढ़ से 67 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां तक पहुंचने में मात्र डेढ़ घंटे का समय लगता है। यह सफर सस्ता तो है ही, साथ ही यहां के खूबसूरत प्राकृतिक नजारे हफ्ते भर की थकान को पलों में दूर कर देंगे।
समुद्र तल से 1795 की ऊँचाई पर स्थित कसौली हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत पर्वतीय स्थल है। यहाँ प्रत्येक ऋतु, मौसम में तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल और खुशनुमा माहौल दिल को अनायास ही लुभा लेती है। 'मंकी प्वाइंट' पर चले जायें या क्राइस्ट चर्च, बस अड्डे पर खड़े हो या माल रोड पर, हनुमान मंदिर में हों या साईं बाबा मंदिर में, हर जगह ठंडी हवायें तन-मन को रोमांचित कर देती हैं। कसौली में एंट्री करते ही इस ठंडक का एहसास होने लगता है।
कसौली अपने खूबसूरती साथ ही स्वास्थ्य लाभों के लिए भी लोकप्रिय है, क्योंकि यहाँ की सुगन्धित, प्रदूषण से रहित और ओज़ोन से भरी हवा उनके लिए बहुत लाभदायक है। यहां एक 'सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट' है, जो काफ़ी विशाल एरिया में फैला है। यहां कुत्तों के काटने पर होने वाली बीमारियों की दवाइयां बनती हैं। दमा के मरीज़ों के लिए यहां आरोग्य आश्रम भी हैं।
यूँ तो यहाँ लोग साल भर आते रहते हैं, लेकिन अप्रैल से जून और सितम्बर से नवम्बर के बीच यहाँ आना बेहतर रहता है। इस वक्त कसौली के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। कभी थोड़ी धूप, कभी थोड़े बादल और कभी हल्की-हल्की बारिश की बूंदें।
कसौली शांत, साफ-सुथरा ख़ूबसूरत और सस्ता पर्यटन स्थल है। यहां की सबसे ऊँची जगह है 'मंकी प्वाइंट'। मंकी प्वाइंट पर बना 'हनुमान मंदिर', कसौली के कोलोनियल आर्किटेक्ट की मिशाल क्राइस्ट बैप्टिस्ट चर्च, बाबा बालकनाथ मंदिर, शिरडी साईं बाबा मंदिर, सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट, एयरफोर्स गार्ड स्टेशन, एशिया का सबसे ऊँचा टीवी टावर और नजदीक ही सनावर स्थित लारेंस स्कूल, पाइनग्रोव स्कूल, सेंट मैरी कान्वेंट स्कूल जैसे प्राचीन स्कूल यहां के अन्य दर्शनीय स्थल हैं।
अपरमाल में अधिकतर सेना के अवकाश प्राप्त लोग रहते हैं। अपरमाल 'मंकी प्वाइंट' तक जाता है। यहाँ श्रीराम के भक्त हनुमान का मंदिर भी है। कहते हैं कि भगवान हनुमान ने लक्ष्मण की जान बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेने जाते समय छलांक के पूर्व कसौली के इस प्वाइंट पर भी कदम रखे थे। मंकी प्लाइंट कसौली बस स्टैड से 4 किलोमीटर दूर है। एक तरफ़ कालका और चंडीगढ़ तो दूसरी तरफ़ सनावर धरमपुर और शिमला।
यहां ट्रेकिंग का क्षेत्र तथा पिकनिक स्थल भी है। अपरमाल पर कसौली क्लब स्थित है, जहाँ का अस्थायी सदस्य बनकर खेलों और पुस्तकालय का लाभ उठाया जा सकता है। क्लब की अन्य सारी सुविधाएं भी अस्थायी सदस्यों को मिलती है।
यह मूलतः सैनिक छावनी है। 1850 में इसे पहली बार छावनी बनाया गया, जब तेरहवीं लाइट इंफैक्ट्री रेजिमेंट बसाया गया। तब से आज तक कसौली देश की प्रमुख छावनियों में गिना जाता है। बंदर और लंगूर भी जगह जगह पर उछलकूद करते दिख जाएंगे। कैंटोनमेंट अस्पताल के सामने से घाटी का विहंगम दृश्य के साथ ही चीड़ के झुरमुट के बीच से सूर्योस्त का कभी न भूलने वाला दृश्य भी दिखता है।
कसौली में सिनेमा हॉल है, जो सेना के अधीन है। यहाँ नियमित फ़िल्में नहीं दिखायी जाती हैं, पर जब भी फ़िल्में लगती हैं, कोई भी देख सकता है। यहाँ से पहाड़ी रास्ते से पैदल सनावर, धरमपुर सबाथू, डगशाई और परवाणू जा सकते हैं। सावथू में 19वीं शताब्दी में बनाया गया गोरखाओं का क़िला है तथा डगशाई में सेना की छावनी है। इसके अतिरिक्त आस-पास कई मंदिर भी हैं। लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित नाहरी देवी मंदिर से होकर बहने वाला ख़ूबसूरत झरना दिखता है। यहाँ साईं बाबा का मंदिर भी है।
यहाँ सबसे पास में कारखाने के नाम पर चार किलोमीटर दूर गड़खल में मोहन मीकिंस की डिस्टिलरी है, जिससे कसौली के पर्यावरण पर संभवतः प्रभाव नहीं पड़ता। यह डिस्टिलरी एशिया की पहली डिस्टिलरी है। कसौली में प्रवेश करते ही बड़ा सा चर्च आता है। यह 'क्राइस्ट चर्च' के नाम से मशहूर है। यहाँ कई सड़कें है- लोवरमाल, अपरमाल और बाज़ार की सड़क। सुबह सूर्योदय का आनंद इस सड़क पर घूमते हुए उठाया जा सकता है।
कैसे पहुंचे-
वायुमार्ग- कसौली का नजदीकी हवाई अड्डा चंडीगढ़ में है, जो कि 65 किलोमीटर है। दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए दिन भर में अनेक उड़ाने हैं। इंडियन एयरलाइंस, किंगफिशर, जेट एयर, जेट लाइट की उड़ाने प्रतिदिन हैं।
रेलामार्ग- दिल्ली से कालका के लिए दिन भर में पाँच गाड़ियाँ हैं। हिमालयन क्वीन, कालका शताब्दी, पश्चिम एक्सप्रेस और हावड़ा-दिल्ली-कालका मेल से कालका तक पहुँच सकते हैं। उसके आगे कालका से शिमला लाइन पर धर्मपुर स्टेशन तक ट्रेन से जा सकते हैं। चाहे कालका शिमला पेसेन्जर लें या कालका शिमला एक्सप्रेस, हिमालयन क्वीन लें या शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस, ये गाड़ियाँ पहाड़ियों की ख़ूबसूरती का नजारा कराती हुई लगभग डेढ़ घंटे में (लगभग 33 किलोमीटर) धर्मपुर पहुँचा देंगी। उसके बाद हिमाचल रोडबेज की बस लेकर यहाँ से केवल 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अपने गंतव्य कसौली पहुँच सकते हैं।
सड़क मार्ग- चंडीगढ़ और कालका से यह क्रमश: 67 व 35 किलोमीटर है। चंडीगढ़ और कालका से भी रोडवेज की नियमित बसें मिलती हैं। दिल्ली से कसौली की दूरी 264 किलोमीटर है। दिल्ली से हिमाचल रोडवेज की बसों के अलावा निजी बसें भी चलती हैं। दिल्ली से अंबाला तक एनएच-1 पर और अंबाला से कसौली के लिए एनएच- 22 पर जा सकते हैं।
कहाँ ठहरें
कसौली की लोकप्रियता को देखते हुए यहाँ ठहरने की बेहतर व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। यानी यहाँ दर्जनों अच्छे होटल, रिजॉर्ट्स, गेस्ट हाउस आदि हैं। हिमाचल टूरिज्म का भी एक हेरिटेज होटल है, जिसका नाम है- 'द रोज कॉमन', लेकिन ठहरने की व्यवस्था समय रहते कर लेनी चाहिए। पर्यटक हिमाचल पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वहाँ स्थित होमस्टे में भी अपनी बुकिंग करा सकते हैं, जो होटलों की तुलना में थोड़े सस्ते हैं।