अब पुलिस नाके पर किसी संदिग्ध गाड़ी को चेक करने के लिए पुलिस को मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि मौके पर ही गाड़ी की आरसी और उस पर लगे नंबर की जांच कर शक दूर कर लिया जाएगा। ऐसा संभव होगा टैब और उसमें इंस्टाल नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वाहन डाटा से।
अक्सर ऐसा होता है कि गाड़ी चोरी की होती है या किसी अपराध में शामिल होती है, लेकिन दस्तावेज टैंपर कर अपराधी उसे चलाते रहते हैं। ऐसी गाड़ियां तभी पकड़ी जाती हैं, जब खास मुखबिरी हो। आम हालात में नाके पर पुलिस कर्मी आरसी चेक करते हैं और गाड़ी को जाने देते हैं।
अब पुलिस ने नए प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल भी शुरू कर दिया है। जल्द ही इसे पंचकूला में एक्टिव कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पुलिस टैब और डाटा कनेक्शन खरीदेगी, जिसे पुलिस नाका के इंचार्ज को सुपुर्द किया जाएगा। अगर कोई संदिग्ध गाड़ी नाके पर रोकी जाएगी तो मौके पर ही उसका नंबर साफ्टवेयर में डालकर चेक कर लिया जाएगा।
अभी ऐसे होती है जांच
अभी तक पुलिस किसी वाहन का पूरा डाटा खंगालने में मशक्कत के दौर से गुजरती रही है। नाके पर कोई गाड़ी पकड़ी गई, फिर पुलिस कर्मी नाके से पुलिस थाने को बताता है। थाने वाले रिकॉर्ड ब्यूरो में जाकर बताते हैं और फिर चेक किया जाता है कि गाड़ी की किसी आपराधिक वारदात में संलिप्तता तो नहीं है।
जेन, इटियोस और वेरना पर होगी पैनी नजर
टैब प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद जेन, इटियोस व वेरना कार पर खास निगाह रहेगी। अब भी इन तीन गाड़ियों को हर स्पेशल नाके पर चेक किया जाता है, लेकिन यह चेकिंग प्रोसेस मैनुअली है। इसमें मौके पर तकनीक का कोई ऑप्शन नहीं है, जबकि टैब मिलने के बाद मौके पर ही ऐसी गाड़ियों का पूरा डाटा खंगाला जा सकेगा।
इन तीन गाड़ियों पर खास नजर रखने का मकसद पंचकूला में मचाया गया आतंक है। जेन, इटियोस व वेरना में आकर ही पंचकूला की कई लूट हुई हैं। जेन से हुई करीब एक दर्जन वारदात तो अब तक सुलझ भी नहीं सकी है। वहीं, इटियोस की तीन और वेरना के जरिए हुई पौने दो करोड़ की लूट भी अनसुलझी है।
कोट
अभी इस प्रोजेक्ट का ट्रायल शुरू किया गया है। टैब इसलिए चुना गया है, क्योंकि इसे कहीं पर भी आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है।
- अजय सिंघल, कमिश्नर ऑफ पुलिस