पंजाब सरकार ने मीटिंग से ठीक पहले बीबीएमबी को पत्र भेजकर इस मीटिंग को स्थगित करने की मांग की। सूत्रों के मुताबिक जल संसाधन विभाग ने यह दलील दी कि बीबीएमबी की मीटिंग तय करने से पहले रेगुलेशन 1976 की धारा-7 के तहत सात दिन का नोटिस जरूरी होता है, इसलिए उचित प्रक्रिया अपनाई जाए। ऐसे में यह बैठक गैरकानूनी तरीके से बुलाई गई है।
क्या है पंजाब की आपत्ति?
बता दें कि भाखड़ा से हरियाणा को अभी 4000 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। इसमें से 800 क्यूसेक पानी राजस्थान, 500 क्यूसेक पानी दिल्ली और 400 क्यूसेक पानी पंजाब को भी जाता है। हरियाणा 8500 क्यूसेक पानी मांग रहा है। इसी पर पंजाब को आपत्ति है। वहीं, चंडीगढ़ में पानी के विवाद को लेकर सर्वदलीय बैठक का भी आयोजन हुआ जिसमें सभी दलों ने भाग लिया।
ये भी पढ़ें: Water Dispute: "पंजाब अपने आवंटित हिस्से से कहीं ज्यादा कर रहा पानी का प्रयोग, हरियाणा को मिल रहा कम पानी"