केंद्रीय सड़क मंत्रालय की ओर से साल 2010 में ट्रैफिक सर्वे करवाया गया था। साल 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से बठिंडा-जीरकपुर फोर लेन सड़क निर्माण कार्य के लिए पहला टेंडर खोलकर हैदराबाद की एक प्राइवेट कंपनी को यह प्रोजेक्ट अलॉट किया गया था।
वहीं प्राइवेट कंपनी ने कुछ समय बाद ही प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने से सड़क निर्माण कार्य करने से मना कर दिया था। इसके बाद इस प्रोजेक्ट का अब तक छह बार टेंडर खोला गया है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने से किसी भी कंपनी की ओर से काम न लेने से जनवरी 2015 तक यह कार्य अधर में लटक गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत 350 एकड़ जमीन एकवायर करने के लिए सरकार ने जमीन मालिकों को करोड़ों रुपये दिए थे। बठिंडा से जीरकपुर तक बनने वाली इस फोर लेन सड़क पर तीन बाईपास पटियाला तक बनाए जाने थे। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से तीन रेलवे फलाई ओवर बनाए जाने थे।
दिसंबर 2014 में इस प्रोजेक्ट का आखिरी टेंडर खोला गया था, लेकिन किसी भी कंपनी ने प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने से इस काम को लेने के लिए टेंडर नहीं भरा।
इस प्रोजेक्ट के पहले टेंडर के समय करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान था, लेकिन अब काम लेने वाली कंपनियों के हिसाब से इस फोर लेन सड़क को तैयार करने में 2300 करोड़ से ज्यादा का खर्चा आ जाएगा। इसके चलते यह प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बनकर रह गया है।
वहीं केंद्र सरकार खुद ही इस फोर लेन सड़क को बनवाएगी और नए सिरे से इस प्रोजेक्ट के लिए काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही टोल टैक्स भी केंद्र सरकार के पास ही जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए छठां टेंडर 11 दिसंबर 2014 को खोला गया था, लेकिन किसी भी कंपनी की ओर से इस टेंडर को भरा नहीं गया।
उन्होंने कहा कि पहले इस काम को बीओटी के आधार पर देना था, लेकिन अब किसी प्राइवेट कंपनी की ओर से काम न लेने को लेकर वह सरकारी स्तर पर करवाएंगे।