जैसे ही हैप्पी के शहीद होने की खबर गांव में पहुंची तो मातम छा गया और गांव के लोग देश के लिए शहीद हुए हैप्पी पर गर्व महसूस करने लगे। इसके अलावा जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी शहीद के गांव पहुंचे। गांव रामनगर निवासी जगसीर सिंह, जगमेल सिंह, गुरजंट सिंह ने बताया कि हैप्पी बचपन से ही सेना में जाना चाहता था। वह सेना में भर्ती होकर देश के लिए कुछ करने की बातें करता था।
चार वर्ष पहले मां की मौत के बाद पिता ने हैप्पी के भाई बलजीत सिंह व उसकी पत्नी को हैप्पी के लिए लड़की ढूंढने का जिम्मा सौंपा था। गांव वालों ने बताया कि हैप्पी इसी माह 11 सितंबर को छुट्टी से वापस गया था। जब हैप्पी छुट्टी पर आया तो पिता ने उसे शादी के लिए कहा। लेकिन हैप्पी ने अपने पिता व परिवार के अन्य सदस्यों से वादा किया कि जब वह अगली बार छुट्टी आएगा तो शादी करके ही जाएगा।