गुरु इंसान के जीवन को एक दिशा देता है, लेकिन टीचर हो तो इस शख्स के जैसा। जो पिछले 10 साल से एक दिव्यांग को रोज उसके घर जाकर पढ़ाते हैं। इनका नाम है, रिटायर्ड प्रिंसिपल पितांबर लाल शर्मा। सेक्टर-46 निवासी 68 वर्षीय पितांबर 27 वर्षीय दिव्यांग स्टूडेंट गणेश शर्मा को पढ़ाने के लिए उसके घर जाते हैं।
पितांबर का सफर भी आसान नहीं
मूल रूप से रोपड़ के रहने वाले पितांबर लाल शर्मा घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बेहतर भविष्य की कामना से 1967 में लोन लेकर चंडीगढ़ आकर रहने लगे। यहां उन्हें सेक्टर 32 स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में जूनियर लेक्चरर की जॉब मिल गई। वह सुबह इंस्टीट्यूट जाकर पढ़ाते और शाम को गवर्नमेंट कॉलेज में इवनिंग क्लासेस में खुद बीएससी नॉनमेडिकल की पढ़ाई करते। फिर धीरे-धीरे उनकी जिंदगी ट्रैक पर आनी शुरू हो गई।
1975 में सेक्टर 22 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वह टीचर लग गए। फिर उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से गाइडेंस एंड काउंसलिंग में डिप्लोमा किया और यहीं पर वह काउंसलर लग गए। पितांबर लाल शर्मा बताते हैं कि 2006 में जब सेक्टर-22 के स्कूल से मेरी रिटायरमेंट हुई तो चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग के डीपीआई (एस)(डायरेक्टर पब्लिक इंस्ट्रक्शन) दलजीत सिंह मांगट ने मुझे गणेश शर्मा नाम के एक दिव्यांग को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी।