समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो इसकी सीख पंचकूला के सेक्टर-7 निवासी तरसेम गर्ग से ली जा सकती है। गर्ग 16 साल से सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेकर जरूरतमंद लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। वे अभी 16 संस्थाओं के पदाधिकारी हैं और इमानदारी और तन्मयता के साथ अपना फर्ज का निर्वाहन कर रहे हैं।
अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 15 सालों में पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए 17000 पौधे बांट चुके हैं। उन्होंने कई पौधरोपण कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लोगों को जागरूक किया है। इसके अलावा उन्होंने एजुकेशन दिलाने के लिए स्लम एरिया के बच्चों को भी जागरूक किया है। जो बच्चे स्कूल नहीं जा सकते हैं, उनके सुधार के लिए वह काम करते हैं।
तरसेम गर्ग ने सुधार सभा के अंतर्गत मुफ्त एजुकेशन देकर करीब 125 बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिल कराया है। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास है कि वह स्लम एरिया बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ा कर शिक्षित करें।
जरूरतमंद बच्चों को बांटीं कॉपी, किताबें
तरसेम गर्ग ने बताया कि वह लायंस क्लब पंचकूला सिटी के प्रधान भी रह चुके हैं। इसके तहत स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, पेंसिल और किताबें मुफ्त मुहैया कराई जाती हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए सामान भी भेजा। इसमें केरल सहित कई राज्यों की मदद के लिए उन्होंने संस्थाओं के लिए मिलकर काम किया है। सरकारी स्कूल सेक्टर- 21 में छात्राओं के लिए बाथरूम भी बनवाया था। समाज में सभी की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहते हैं।
सामाजिक कार्यों से फीलगुड महसूस होता है
तरसेम गर्ग ने चार साल से कामधेनु गौशाला पिंजौर से जुड़े हैं। शहर में गोग्रास समिति के माध्यम से घर जाकर रोजाना 15 रेहड़ियां गो ग्रास इकट्ठा की जाती है। इसमें हरा चारा, सूखा आटा, चोकर और गुड़ गौशाला भेजा जाता है। उन्होंने कहा, ‘यह मेरा सौभाग्य है कि मैं सरकार की मुहिम के साथ अपने शहर में गौ माता की सेवा के लिए जुड़ा हूं’।
उन्होंने बताया कि समाज के लोगों की मदद करने से उन्हें फीलगुड महसूस होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि लोग भी उनका उत्साह बढ़ाते हैं। इससे उनमें ऊर्जा का संचार पैदा होता है। सामाजिक कार्यों को देखते हुए तरसेम गर्ग को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
पंचकूला से वृद्धाश्रम आना जाना बना है
तरसेम गर्ग सेक्टर- 15 पंचकूला के वृद्ध आश्रम में लोगों की सेवा करने जाते रहते हैं। यहां पर मेडिकल कैंप आयोजित कर बुजुर्गों का स्वास्थ्य चेकअप करवाते हैं। उनकी दिली इच्छा है कि वे हमेशा सामाजिक सरोकार में बढ़-चढ़कर भाग लें। सबसे बड़ी बात यह है कि उनका परिवार ही उनकी सामाजिक कार्यों का प्रेरणास्रोत है। परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहता है। वे इसके लिए मित्रगण, रिश्तेदार और सगे संबंधियों का भी धन्यवाद करते हैं।
उन्होंने कहा, जरूरतमंद लोगों के ऑपरेशन का खर्चा भी ट्रस्ट के साथ मिलकर वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के माध्यम से करीब एक हजार से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। उन्होंने लोगों की मदद के लिए जब संस्थाओं का साथ मांगा तो सभी ने उनका सपोर्ट किया। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से सिविल अस्पताल के बाहर लंगर भी लगाया जाता है।