पिता किसान, कभी खेत में खेल ली तो कभी गांव के आंगन में। नहीं जानते थे कि हिसार की ये दोनों बेटियां हरियाणा का नाम रोशन करेंगी। ये नेशनल कबड्डी खिलाड़ी हैं कुलेरी गांव की मंजू शर्मा और नहला की सुदेश कुमारी। दोनों ही खिलाड़ियों के पिता किसान हैं। स्कूल में एथलेटिक गेम से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दौड़, रस्साकशी, कबड्डी आदि खेलों में कई पदक हासिल किए।
हाल ही में दोनों खिलाड़ी महाराष्ट्र में हुई छठी नेशनल कबड्डी ग्रामीण महिला एवं पुरुष खेलकूद प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली हरियाणा की टीम का हिस्सा थीं। हरियाणा की जीत में दोनों खिलाड़ियों ने जी जान एक कर दिया था। प्रतियोगिता में सुदेश कुमारी को बेस्ट रेडर और मंजू शर्मा को बेस्ट कैचर घोषित किया गया था। दोनों खिलाड़ी रस्साकशी की भी माहिर खिलाड़ी हैं और कई बार राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं।
मेडल मिले तो मिलता गया सहयोग
कुलेरी गांव की सुदेश ने बताया कि उसने नौवीं कक्षा में खेलना शुरू किया था। कोच राकेश ने गांव में ही लड़कियों को खेल की प्रैक्टिस करवानी शुरू कर दी। शुरुआत में कुछ कम लड़कियां आईं। जैसे-जैसे रुचि बढ़ी, वैसे-वैसे खेलों में मेडल आने शुरू हो गए। मेडल आए तो पिता और परिवार के लोगों ने खेल पर ही ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया। सुदेश ने बताया कि अब रस्साकशी और कबड्डी पर ही उसका उसका सबसे ज्यादा फोकस है। सुदेश के पिता जगदीश किसान हैं और मां संतोष गृहिणी है।
सुदेश : खेत के काम और पढ़ाई में भी अव्वल
20 वर्षीय सुदेश ने बताया कि वह अक्सर खेत में भी जाती है और खेत के कामों में परिवार का हाथ बंटाती है। वहीं सुदेश ने 10वीं में 78 और 12वीं में 62 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। फिलहाल वह डिस्टेंस से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही है, ताकि पढ़ाई के साथ खेल को भी पूरा समय दे सके।
सुदेश की उपलब्धियां
- पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी में गोल्ड।
- राष्ट्रीय स्तर पर रस्साकशी में दो बार सिल्वर मेडल।
- राज्य स्तर पर रस्साकशी में दो बार गोल्ड मेडल।
- दो बार इंटर कॉलेज में गोल्ड मेडल।
- दो बार इंटर यूनिवर्सिटी में लिया हिस्सा।
मंजू : नाना के घर रहकर की प्रैक्टिस
गांव नहला की मंजू शर्मा ने बताया कि उसने चौथी कक्षा में ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। लंबे समय तक की कड़ी मेहनत की बदौलत राष्ट्रीय स्कूली प्रतियोगिता में हरियाणा की कबड्डी टीम में चयन हुआ, जहां गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद समैण गांव में अपने नाना के घर रहकर कबड्डी की प्रैक्टिस की। रस्साकशी नौवीं कक्षा में खेलना शुरू किया, जिसके बाद से अब तक छह बार राष्ट्रीय स्तर पर रस्साकशी खेल चुकी है। मंजू अब हिसार में कबड्डी की प्रैक्टिस करेगी। मंजू के पिता श्रीनिवास भी किसान है और उनकी मां पार्वती गृहिणी है।
घर के काम में भी बंटाती है हाथ
मंजू ने बताया कि वह खेल के अलावा घर के काम में भी मां को हाथ बंटाती है। वहीं मंजू ने 10वीं में 75 प्रतिशत और 12वीं में 73 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अब कॉलेज में दाखिला लेकर बीए करेगी।
मंजू की उपलब्धियां
- 2016 में हुई नेशनल रूरल कबड्डी में गोल्ड मेडल।
- 2011 में जयपुर में हुई नेशनल स्कूली कबड्डी में गोल्ड मेडल।
- छह बार नेशनल रस्साकशी प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल।
- कुश्ती में राज्य स्तर पर हिस्सा।