महिला दिवस के मौके पर मिलवाते हैं, एक ऐसी प्रेरणा शक्ति से, जो मजदूरों के बच्चों का सहारा बनकर उन्हें नया जीवन दे रही हैं। पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की डाक्टर भवनीत भारती ने एक साथ कई मुहिम छेड़ रखी है। पीजीआई में निर्माणाधीन बिल्डिंग के काम में जुटे मजदूरों के बच्चों के लिए उन्होंने पीजीआई में ही दो क्रेच खोला है। एक क्रेच में 15 बच्चे हैं तो दूसरी क्रेच में 60-70 बच्चे। ये सभी मजदूरों के बच्चे हैं।
वे और उनके कुछ दोस्त बच्चों को पढ़ाते हैं। आर्ट्स के काम को सिखाया जाता है। 15, 16 और 17 अप्रैल को इन्हीं बच्चों के काम की एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा पीजीआई में के कर्मचारियों के लिए भी एक क्रेच संचालित करती हैं। उनका कहना है कि पहले क्रेच खाली रहती थी, लेकिन जब से उसे अपडेट किया गया है, तब से वेटिंग लिस्ट बढ़ती जा रही है। 40 लोग वेटिंग में हैं। उनके कदम यही नहीं रुकते।
उन्होंने पिछले पांच साल से गौरैया पक्षियों को बचाने की मुहिम छेड़ रखी है। वे पीजीआई आने वाले बच्चों को गौरैयों के प्रति जागरूक करती हैं। हर साल गौरैया दिवस मनाती हैं। इससे बच्चों और बड़ों में गौरेयों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। समाजसेवा से उन्हें इतना लगाव है कि उन्होंने दो साल तक हिमाचल के रोहड़ू में मरीजों की सेवा की। उनकी क्वालिफिकेशन काफी हाई होने के बावजूद उन्होंने डिस्ट्रिक हास्पिटल में काम करना ज्यादा मुनासिब समझा।