पंजाबी के लेक्चरर ओम प्रकाश को पेड़ पौधों से इस कदर लगाव हुआ कि उनके कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति से नेशनल अवार्ड मिला। वे चंडीगढ़ के सेक्टर-16 के गर्वनमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं। वे एक दो नहीं, शहर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की 135 इको क्लब के को-आर्डिनेटर बन गए।
पर्यावरण के प्रति उनकी लगन के चलते यूटी प्रशासन ने उन्हें वर्ष 1997 में स्टेट अवार्ड से नवाजा और 2011 में राष्ट्रपति ने नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया। पर्यावरण विभाग की ओर से भी उन्हें पुरस्कृत किया गया है।
ओम प्रकाश जिस स्कूल में रहे, वहां हर्बल गार्डन बनाना नहीं भूले। उन्होंने अब तक 50 से अधिक स्कूलों में हर्बल गार्डन का निर्माण किया है। अब उनका लक्ष्य हर्बल म्यूजियम बनाने का है। इस पर उन्होंने कवायद भी शुरू कर दी है। पर्यावरण विभाग ने 2010 में इको क्लब बनाए, उस समय उनकी गिनती 121 थी और अब बढ़कर 135 तक पहुंच चुकी है।
औषधीय पौधे कर रहे तैयार
ओम प्रकाश ने बताया कि वे पत्थर चट, अश्वगंधा, रति, पीपली, मंडूक परनी, ब्राह्मी, पत्थर चूर, जंगली इसबगोल, बशाका, पीत बिरंगी, भूंगराज, विनक्षा, तुलसी, एलोवेरा,मुलहठी, सदाबहार गुलाबी और सफेद, बच्च, लेमनग्रास, निरगुंडी, शंखपुष्पी, गुड़हल, सफेद मुसली, कढ़ी पत्ता और नियाज बो जैसे औषधीय पौधे तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन औषधीय पौधों में बहुत ताकत है। डेंगू होने पर इन्हीं हर्बल पौधों से उन्होने अपना इलाज किया था।
स्कूली पढ़ाई के समय पौधों के प्रति जगी दिलचस्पी
ओम प्रकाश का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के समय से ही उन्होंने पौधों के बारे जानकारी हासिल करनी शुरू कर दी थी। बच्चों को जागरूक करना उनका मुख्य काम है। इसकी शुरुआत उन्होंने वर्ष 2008 में 25 पौधे देकर शुरू की थी।
अब तक स्कूल प्रशासन और पर्यावरण विभाग के माध्यम से 25 हजार से भी अधिक पौधे बांट चुके हैं। ओम प्रकाश का कहना कि वे हर्बल नर्सरी बना रहे हैं। पहली बार मुलहठी के पौधे तैयार करने में लगे हैं। उनका मानना है कि बच्चों को हर्बल पौधे तैयार करने और उसके उपयोग के बारे में जानकारी देना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है।