स्थानीय सरकारी अस्पताल में हड्डियों के माहिर (ऑर्थो) डॉक्टर पिछले 25 दिनों से ड्यूटी पर नजर नहीं आ रहे।
इस कारण हादसों में चोटिल और हाथ, पैर टूटने वाले रोगियों को इलाज करवाने में परेशानी हो रही है। इन मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है।
इसके अलावा भारी मुश्किलों का सामना निशक्तों को करना पड़ रहा है। सप्ताह में दो बार स्थानीय सिविल अस्पताल में निशक्तों को निशक्तता सर्टिफिकेट बनाकर उन्हें देना होता है, ताकि निशक्त लोग सरकारी स्कीमों का लाभ ले सकें।
अस्पताल से लंबे समय से ऑर्थो डॉक्टर की गैरहाजिरी मरीजों के लिए भारी परेशानी का सबब बन गया है।
गुरबाज सिंह बाज ने कहा कि निशक्तों की मुश्किलों को देखते हुए राज्य सरकार को सिविल अस्पताल में तुरंत आर्थो का दूसरा डॉक्टर भेजना चाहिए।
एसएमओ ने कहा कि आर्थो के डॉक्टर की गैरहाजिरी के कारण निशक्तों और चोटिल मरीजों का भारी परेशानी आ रही है।
दूसरी तरफ सूत्रों के अनुसार सिविल अस्पताल से गैरहाजिर चल रहे आर्थो डॉक्टर संजीव अरोड़ा ने गुरुहरसहाय शहर में किसी निजी अस्पताल में ज्वाइन कर लिया है, लेकिन अभी उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया।
जब डॉक्टर संजीव अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामूली चोट आ गई थी। इस बारे में उन्होंने सिविल अस्पताल के एसएमओ और सीएमओ को जानकारी देकर गए हुए हैं।