लाडवा। चुनावी गतिविधियों में व्यस्त कांग्रेस या अन्य किसी राजनीतिक दल के नेता को स्वतंत्रता सेनानी अजमेर सिंह मलिक को अंतिम विदाई देने का समय नहीं मिला।
दूसरी ओर गांव खेड़ी दबदलान में दिवंगत मलिक को नम आंखों और राजकीय सम्मान के साथ बंदूकों की सलामी देकर अंतिम विदाई दी गई।
गांव के स्वर्गाश्रम में पंचतत्व में विलीन हुए स्वतंत्रता सेनानी अजमेर सिंह मलिक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सहयोगी रह चुके हैं।
बापू के साथी एवं देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले 88 वर्षीय इस विभूति को ग्रामीणों एवं नायब तहसीलदार एवं खंड विकास अधिकारी की मौजूदगी में अंतिम विदाई दी गई।
देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका अदा कर चुके महान सपूत एवं स्वतंत्रता सेनानी अजमेर सिंह मलिक का मंगलवार को देहांत हो गया।
वे 88 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ थे। पैतृक गांव खेड़ी दाबदलान में स्वतंत्रता सेनानी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
उनके बेटे महिंद्र सिंह मलिक ने बताया कि उनके पिता अजमेर सिंह मलिक भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सहयोगी बनकर उनके साथ रहे।
उनके अनुसार आजादी के बाद उनके पिता गांव के सरपंच भी चुने गए थे, जबकि उन्होंने स्वतंत्रतता सेनानियों के लिए कार्य कर रहे संगठन में भी अहम भूमिका निभाई थी।
दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र महेंद्र ने बताया कि उसके पिता कांग्रेस के स्वतंत्रता सेनानी विंग के भी प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं और इस समय भी वह जिला कष्ट निवारण समिति के सदस्य थे।
मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी अजमेर सिंह की मौत का जैसे ही लोगों को पता चला, पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल बन गया। उनके अंतिम संस्कार से पहले बंदूकों की सलामी दी गई।
इसके अलावा प्रशासन की और से नायब तहसीलदार राजेंद्र गुप्ता, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कंवरभान नरवाल, लाडवा थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर लाडवा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने मृतक स्वतंत्रता सेनानी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।