लुधियाना में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल।
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पठानकोट में भी सरकारी बैंकों में लेनदेन नहीं हुआ। पहले दिन की हड़ताल में बैंकों का लगभग 55 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक अफसर यूनियन रीजनल सचिव प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि बैंकों का निजीकरण होने से आम जनता, किसान, लघु बचतकर्ता, पेंशनभोगी व मध्यवर्गीय उद्योगपतियों को नुकसान होगा। सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो संघर्ष और तेज कर दिया जाएगा।
बठिंडा में बैंक कर्मियों का धरना
बैंक कर्मियों ने सोमवार को गोनियाना रोड पर स्थित बैंक आफ इंडिया के कार्यालय के सामने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरना दिया। बैंक कर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ हड़ताल कर अपना रोष जताया। यूनियन नेता पवन जिंदल ने आरोप लगाया कि बैंकों से बड़े व्यापारी कर्ज लेकर विदेश फरार हो गए हैं। केंद्र सरकार उन्हें पकड़ने के बजाय बैंकों पर घाटे का आरोप मढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जो बैंक डूब चुके है, उनका ज्यादातर पैसा उन व्यापारियों ने हजम किया जो मौजूदा समय में विदेश में बैठे हैं। धरने के बाद बैंक कर्मियों ने रैली निकाल कर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
250 बैंक शाखाओं में 300 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
पटियाला में करीब 250 शाखाओं में कामकाज ठप रहा। इसकी वजह से जिले भर में करीब 300 करोड़ का लेनदेन नहीं हो सका। यह जानकारी पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव एवं एआईबीईए के संयुक्त सचिव एसके गौतम ने दी। उधर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों ने पंजाब नेशनल बैंक, सर्कल ऑफिस और छोटी बारादरी के सामने रैली की। एसके गौतम ने कहा कि बैंकों के निजीकरण का केंद्र सरकार का निर्णय देश और आम लोगों के हित में नहीं है।
लुधियाना में बंद बैंक।
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लोग अपने जीवन भर की बचत सार्वजनिक बैंकों में रखते हैं। सामान्य लोग सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। क्योंकि सरकारी बैंकों में सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध हैं। संयुक्त सचिव विनोद शर्मा ने कहा कि 1969 में 14 प्रमुख निजी बैंकों और 1980 में छह का राष्ट्रीयकरण करने के बाद ही देश के बैंकिंग उद्योग का विस्तार और विकास संभव हो सका है। राष्ट्रीयकरण से पहले बैंक शाखाएं केवल 8500 थीं, जो अब लगभग 1,50,000 हैं। इस कारण सरकार को अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
उधर, पटियाला में ही कई अन्य विभागों के कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। इन कर्मचारियों ने केंद्र की निजीकरण की नीतियों का विरोध किया और रेलवे स्टेशन के सामने फ्लाईओवर के नीचे रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेता निर्मल सिंह धालीवाल, दर्शन सिंह लुबाना, बलदेव राज बत्ता ने कहा कि केंद्र सरकार जनविरोधी फैसले ले रही है।
कृषि कानून, सरकारी विभागों का निजीकरण, श्रम कानूने और बिजली बिल 2020, मोटर व्हीकल एक्ट 2020 में संशोधन से लोगों को परेशानी होगी। मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा स्कीमों को कमजोर किया जा रहा है। बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़कर रख दी है। डीजल-पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं और गैस सिलिंडर कीमतें बढ़ रही हैं। खास तौर से गरीब वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी खाना मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार को इनकी कोई चिंता नहीं है।
बैंकों के निजीकरण के विरोध में उतरे कर्मचारी
सुनाम में भी चार बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सोमवार को स्थानीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के पास धरना दिया गया। इस दौरान बैंक मुलाजिमों और अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यूनियन के प्रतिनिधि विक्रमजीत सिंह ने कहा कि निजी बैंक पहले ही लोगों के पैसे लेकर भाग गए हैं। ऐसे में यदि सरकारी बैंक भी निजी हाथों में सौंप दिए गए तो लोगों के खून पसीने की कमाई का कोई रक्षक नहीं रहेगा।
मुक्तसर में भी हड़ताल
सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में रोष मार्च निकाला। यह मार्च मलोट रोड पर स्थित एसबीआई बैंक शाखा से शुरू होकर शहर के विभिन्न स्थानों से होते हुए मस्जिद चौक स्थित पीएनबी के पास जाकर समाप्त हुआ। यहां पर बैंक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बैंक कर्मियों के प्रदर्शन को किसानों ने भी समर्थन दिया और कृषि कानूनों का विरोध किया।