फर्जी चेक से पीजीआई के अकाउंट से गायब 48 लाख रुपये का मामला सुलझ गया है। इस मामले में एसबीआई बैंक ने अपनी गलती मान ली है और पीजीआई के अकाउंट में पूरी राशि वापस आ गई है। जिस कंपनी के नाम से बैंक से रुपये निकले गए, उसके खिलाफ बैंक ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस घटना के बाद पीजीआई ने एक नियम बना दिया गया है कि चंडीगढ़ के बाहर किसी भी बैंक से एक लाख रुपये के ऊपर के चेक से रुपये नहीं निकाले जा सकेंगे। एक लाख रुपये से ऊपर की राशि के चेक चंडीगढ़ की बैंक शाखा से निकाले जाएंगे।
बीते 25 अक्तूबर को पीजीआई को सूचना मिली कि उसके अकाउंट से इंदौर स्थित एसबीआई की शाखा से 48 लाख रुपये निकाले गए हैं। पीजीआई ने इस बारे में स्थानीय एसबीआई बैंक से कंफर्म किया तो पता चला कि 23 अक्तूबर को इंदौर की ब्रांच से सनराइज टेलीशॉपिंग के एकांउट में 48 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए हैं। सूचना मिलते ही पीजीआई हरकत में आया और अपनी पैमेंट रुकवाने की कोशिश की। मगर तब तक 32 लाख रुपये फर्म की एकाउंट में जा चुके थे। 16 लाख रुपये बैंक ने फ्रीज कर दिए हैं।
जांच में पता चला है कि नौंवे महीने में पीजीआई का एक 17 हजार रुपये का चेक एक फर्म के नाम पर जमा हुआ था। उस चेक नंबर को कापी कर डुप्लीकेट चेक बनाया गया और उससे 48 लाख रुपये निकाल लिए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि स्थानीय बैंक के कर्मचारियों ने पुराने वाले चेक को पंच नहीं किया था। मतलब उसे साफ्टवेयर में अपडेट नहीं किया गया। यदि होता तो चेक क्लियर ही नहीं होता। पीजीआई की ओर से किसी फर्म को 25 हजार रुपये से ऊपर का चेक नहीं जारी होता है।
इससे ऊपर की रकम को एनईएफटी के जरिए ट्रांसफर की जाती है। फिर बैंक ने इस पर चेक क्यों नहीं रखा। दूसरी खास बात यह है कि जिस फर्म के अकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उसमें न्यूनतम पैमेंट भी नहीं था। बैंक न्यूनतम पैमेंट नहीं रखने पर रुपये भी काट रहा था। ऐसे में जब फर्म की अकाउंट में रुपये आए तो इंदौर की बैंक ने चैक क्यों किया। जबकि अब तो दो लाख रुपये से ऊपर की रकम निकालने पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस मामले का खुलासा होने के बाद पीजीआई अपनी जांच कर रहा था। बैंक की ओर से भी जांच जारी थी।