चंडीगढ़। बांग्लादेश में दो महीने से चल रहे आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। पूरे बांग्लादेश में अफरा-तफरी है और हिंसा फैली है। चंडीगढ़ और आसपास के कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बांग्लादेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उनका परिवार से संपर्क टूट चुका है। इंटरनेट के साथ यातायात भी बंद है। परिवार की सुरक्षा को लेकर छात्र चिंता में डूबे और डरे हुए हैं।
ढाका में रहने वाले मार्टिन ग्रीन हस्दा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। मार्टिन कुछ दिन पहले अपने घर बांग्लादेश गए थे, मार्टिन का कहना है कि कुछ दिन पहले हालात थोड़े सामान्य थे, लेकिन यातायात की समस्या दो हफ्ते पहले से ही लोगों को झेलनी पड़ी है। मार्टिन ने बताया कि वे देश में हालात खराब होने से पहले ही चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए थे, जिसके लिए उन्हें तीन बसों का सहारा लेना और बताया कि वो शहर में पहुंचे भी नहीं थे कि हिंसा की खबर पता चली। मार्टिन के परिवार के 11 सदस्य अभी भी बांग्लादेश में ही है। उन्होंने बताया कि उनका घर वालों से भी संपर्क टूट गया है। पल-पल के लिए डर लग रहा है। हालत काफी नाजुक है। कुछ कह नहीं सकते हैं कि कब क्या हो जाए।
कई स्टूडेंट्स बिगड़ते हालातों की वजह से वहीं फंसे : विदेशी विद्यार्थियों से बातचीत कर रहे इंटरनेशनल स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर सन्नी धालीवाल ने बताया कि हर पल की जानकारी के लिए विद्यार्थियों से संपर्क करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कई स्टूडेंट हैं, जो बांग्लादेश में बिगड़ते हालातों की वजह से वहीं फंस गए हैं। बांग्लादेश में बिगड़ते हालातों की वजह से काफी सारे विद्यार्थियों का अपना परिवारों से संपर्क टूट गया है, जिसकी वजह से सभी बांग्लादेशी विद्यार्थी काफी चिंतित है।