फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: कक्षा 11वीं के छात्र को पीटकर किया लहूलुहान

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। मलोया आरसी-एक स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से सोमवार दोपहर को छुट्टी के बाद बच्चे गेट से बाहर निकल रहे थे कि अचानक से कुछ लड़के आए और उन्होंने 11वीं के एक छात्र को पीटना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उन्होंने डंडों से पीटकर उसे लहूलुहान कर दिया और वहां से फरार हो गए। इसके बाद छात्र को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। वारदात के समय वहां पर कोई पीसीआर भी मौजूद नहीं थी। घटना क्यों हुई, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। मामले की जानकारी पुलिस को दे दी गई है।
विज्ञापन

छात्र के साथ हो रही मारपीट के दौरान उसे रोकने के लिए बाहर के लड़के आए और छात्र से उसके माता-पिता का नंबर मांगा। वहीं, वारदात का वीडियो बना रहे लोगों ने मारपीट को लेकर गार्ड को कोसा, जो साथ में खड़े थे लेकिन उसे रोकने को कोशिश नहीं की। इस पर गार्ड ने जवाब दिया कि मामला गेट के बाहर का है अंदर का नहीं। इससे पहले भी मलोया के स्कूलों के बाहर छात्र के साथ मारपीट के मामले आए हैं, जहां उन्हें बुरी तरह से जख्मी किया।
शिक्षा विभाग ने यूटी पुलिस से अनुरोध किया है कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय गेट के पास पीसीआर तैनात रखें ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। प्रधानाचार्य उपासना ने बताया कि बच्चे को शिक्षकों द्वारा सेक्टर-16 के अस्पताल ले जाया गया और वह खतरे से बाहर है। घटना स्कूल के बाहर होने से उनके पास मारपीट की सीसीटीवी फुटेज नहीं है। छात्र ने हाल में ही 11वीं कक्षा में दाखिला लिया है।
विज्ञापन






जगह के हिसाब से बदलता प्रशासन का रवैया :

सेक्टर-26 रोड पर जहां चार निजी स्कूल तैनात हैं, वहां ट्रैफिक की समस्या न हो इसलिए पुलिस और शिक्षा विभाग ने हाल ही में बैठक की थी। सड़क पर छुट्टी के समय गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, सेंट कबीर स्कूल और सीसीईट और उससे थोड़ा आगे चारों जगहों पर छुट्टी के समय 10-15 पुलिसकर्मी को ड्यूटी पर देखा जा सकता है। वहीं, मलोया में बने चार स्कूलों में जहां हजारों बच्चे पढ़ रहे हैं और अक्सर छुट्टी के समय मारपीट और झगड़े के मामले होते हैं, वहां एक भी पीसीआर भी तैनात नहीं होती। फरवरी माह में भी इस तरह की घटना सामने आई थी जब छात्र को युवक चाकू मार कर चले गए थे और शिक्षकों ने बच्चे की कोई मदद नहीं की थी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें