कोरोना महामारी के दौरान भ्रामक खबरों और अफवाहों से बचने को लेकर डीसी निशांत कुमार यादव ने सोशल मीडिया और गैर मान्यता प्राप्त चैनलों तथा पत्रों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 10 जुलाई से 24 जुलाई मध्यरात्रि 12 बजे तक प्रभावी रहेगा। आदेशों की अवहेलना होने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 505(1), आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 तथा एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1957 की धारा 1 व 2 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है।
करनाल शहर समेत कस्बों में भी कुछ लोग बिना मान्यता और परमिशन के ही सोशल मीडिया पर खबरें चलाते हैं। इन लोगों ने अपने चैनल तक बना रखे हैं। ऐसे में कोरोना महामारी के दौरान कई बार अफवाहें फैलने की आशंका रहती है। यही कारण है कि डीसी ने गैर सत्यापित और भ्रामक तथ्यों के आधार पर समाचारों का संप्रेषण, सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, व्हॉट्सएप, ट्विटर, टेलीग्राम, पब्लिक एप आदि पर पाबंदी लगा दी है।
आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में देश कोरोना संक्रमण के संकट से गुजर रहा है। ऐसे में जो भी व्यक्ति आपदा या इसकी गंभीरता के संबंध में झूठी चेतावनी को प्रसारित करता है, जिसके परिणाम स्वरूप समाज में लोगों के बीच घबराहट फैलती है, ऐसी झूठी चेतावनी फैलाने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक कारावास की सजा और जुर्माना किया जा सकता है।
जिला न्यायधीश निशांत कुमार यादव ने सभी से अपील की है कि वे आदेशों का पालन करें, अन्यथा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके तहत एक साल तक की सजा का प्रावधान है।