पंजाब के सरकारी स्कूलों के आसपास की दुकानों पर भी जंक फूड नहीं बिकेगा। स्कूलों की कैंटीन में भी जंक फूड पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। शिक्षा विभाग बच्चों की सेहत के प्रति संजीदा हो गया है।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने जंक फूड को लेकर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। सीबीएसई ने पहले ही जंक फूड के नुकसान को समझते हुए इस पर पाबंदी के दिशानिर्देश जारी किए थे।
अब शिक्षा विभाग ने भी इसकी पहल की है। डीजीएसई ने बच्चों को तंदरुस्त रखने के लिए सभी डीईओ को विशेष हिदायतें जारी की हैं।
स्कूलों में स्वास्थ्य जांच के बाद खुलासा
इसमें कहा गया है कि स्कूलों के अंदर कैंटीन में या आसपास कोई ऐसी दुकान न हो जहां जंक फूड उपलब्ध हो। विद्यार्थियों को हिदायत दें कि घर से टिफिन लाएं।
बच्चों को जंक फूड के नुकसान के बारे में बताया जाए और पौष्टिक आहार के फायदों के बारे में जागरूक किया जाए। इसके अलावा स्कूलों में खुराक और सेहत से संबंधित सेमिनार और डिस्कशन आयोजित किए जाएं। उल्लेखनीय है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों का हर महीने हेल्थ चेकअप कराया जाता है।
चेकअप के दौरान भी सामने आया है कि बच्चों की सेहत और फिटनेस वैसी नहीं है, जैसी कि होनी चाहिए। बहुत से बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। तो कइयों को मोटापे की समस्या है।
विदेशों के कई स्कूलों में जंक फूड पर पाबंदी
माहिरों के मुताबिक ,इन सब के लिए बच्चों की खानपान की आदतें और जंक फूड जिम्मेदार हैं। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने बच्चों की सेहत पर फोकस किया है।
स्कूलों के आसपास स्थित दुकानों पर जंक फूड की बिक्री न हो, इसकी जिम्मेदारी सेहत विभाग की रहेगी। स्कूल महानिदेशक जीके सिंह द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, शिक्षा विभाग या संबंधित स्कूल इस बारे में जिला सेहत अफसर को सूचित करेंगे।
स्कूल के आसपास की दुकानों की रेगुलर चेकिंग करके यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां जंक फूड न बिके। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने जंक फूड से बच्चों को रहे नुकसान पर चिंता जताई थी।
डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2011 में गाइडलाइन जारी कर स्कूलों और प्ले ग्राउंड में जंक फूड पर पाबंदी लगा दी थी। ब्रिटेन समेत कई देशों ने स्कूलों में जंक फूड पर पहले ही पाबंदी लगाई हुई है।