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तंबाकू व सुपारी पदार्थों के विज्ञापनों पर लगे प्रतिबंध, स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा पत्र

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चंडीगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने स्वास्थ्य मंत्रालय को तंबाकू व सुपारी पदार्थों के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगवाने के लिए पत्र लिखा है। पत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान के लिए सामरिक संस्थान (साइफर) ने संज्ञान में लाया है कि पान मसाला में सुपारी एक नशीला और कार्सिनोजेनिक उत्पाद होता है। यह हमेशा धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पाद के साथ मिलाया जाता है जो उपभोग में हानिकारक है। कानून इन उत्पादों के विज्ञापनों को प्रतिबंधित करता है इसलिए उनके विपणक ने इसे परोक्ष रूप से विज्ञापित करने के तरीके खोजे हैं। पान मसाले के सेवन से कैंसर व अन्य भयानक बीमारियां सामने आ रही हैं।
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साइफर के डायरेक्टर डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि पान मसाला उद्योग की मार्केटिंग रणनीति के दो मुख्य रूप ब्रांड एक्सटेंशन और मशहूर हस्तियां हैं। यहां फिल्मी सितारे भूमिका निभाते हैं। गुटखे के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगने के बाद उद्योग नए तरीके से इसका विज्ञापन कर रहे हैं। इसमें गुटखे की ब्रांड सुपारी या माउथ फ्रेशनर का विज्ञापन सेलिब्रेटी की मदद से पेश करती है। बाजार में उस ब्रांड का माउथ फ्रेशनर की बजाय गुटखा ही बेचा जा रहा है। ऐसे दोगले तरीके से विज्ञापन कर लोगों में तंबाकू और गुटखा सेवन के लिए प्रचार किया जाता है। सादे पान मसाला में सुपारी, कत्था और खुशबू के लिए कई पदार्थ मिलाए जाते हैं। ये भी लोगों की सेहत के लिए हानिकारक है। सादे पान मसाले में इस्तेमाल सुपारी से भी कैंसर होता है और इससे नशे की लत भी लग जाती है। उन्होंने कहा कि इसके विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगवाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ सभी आईएमए और सेलिब्रिटी को भी पत्र लिखा है।
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