लुधियाना नगर निगम की नए सिरे से वार्डबंदी को चुनौती देते हुए विधायक सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर सिंह बैंस द्वारा दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और निदेशक सहित राज्य चुनाव आयोग, लुधियाना के डीसी और नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को 5 फरवरी के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
याचिका में बैंस भाइयों ने कहा कि पहले लुधियाना नगर निगम में 75 वार्ड्स थे। इस बार नए सिरे से वार्डबंदी कर उनकी संख्या 95 कर दी गई है। बैंस ने कहा कि वार्डबंदी के लिए गठित डीलिमिटेशन बोर्ड के वह सदस्य थे। वार्डबंदी के लिए यह सुनिश्चित किया जाना बेहजद ही जरूरी होता है कि हर वार्ड में जनसंख्या का अनुपात बराबर हो, लेकिन इस बार इन नियमों का उल्लंघन कर वार्डबंदी कर दी गई।
वर्ष 2011 की जनगणना के बाद प्रतिवादियों ने वर्ष 2017 का गलत जनसंख्या सर्वे कर यह वार्डबंदी कर दी है। बताया गया कि सर्वे के अनुसार लुधियाना की जनसंख्या 17 लाख 96 हजार 89 है। यहां 95 वार्ड हैं । इस लिहाज से प्रत्येक वार्ड में औसतन 18 हजार 900 लोग होने चाहिए। लेकिन वार्डबंदी के बाद किसी वार्ड की जनसंख्या बहुत अधिक है तो किसी की बहुत कम। कई वार्डों में पहले की तुलना में जनसंख्या में 50 से 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है तो कई में 50 प्रतिशत तक की कमी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसने इस नई असमान वार्डबंदी के खिलाफ 27 सितंबर, 6 नवंबर और 19 दिसंबर को आपत्ति भी दर्ज करवाई थी बावजूद इसके सरकार ने उनकी आपत्तियों की पूरी तरह से उपेक्षा की और उनकी अनुपस्थिति में बोर्ड की बैठक में 21 दिसंबर को नई वार्डबंदी की नोटिफिकेशन जारी कर दी।