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कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने में नया पेंच!

Tue, 29 Apr 2014 02:18 PM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने में सुप्रीम कोर्ट का उमा देवी मामले से जुड़ा फैसला आड़े आ सकता है।
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हरियाणा कर्मचारी तालमेल समिति और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की गत 26 फरवरी को हुई बैठक में तीन साल तक की सेवा वाले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला हुआ था। लेकिन अब उस बैठक की कार्रवाई जारी हुई तो सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी एंड केसरी फैसले का ध्यान रखकर पालिसी बनाने की बात कही गई है।

तालमेल समिति के सदस्यों ने बैठक के बाद घोषणा की थी कि मुख्यमंत्री ने उनकी यह सबसे बड़ी मांग मान ली थी कि जिन कच्चे कर्मचारियों को 28 फरवरी, 2014 को तीन साल हो गए हैं उन्हें नई नीति बनाकर रेगुलर किया जाएगा। अब मुख्य सचिव कार्यालय ने सब विभागों को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक की कार्रवाई भेजी है।
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रेगुलर करने के बारे में यह लिखा है

हरियाणा के कई संगठनों में कांट्रैक्ट, डेली वेजेस और वर्क चार्ज आदि पर रखे कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग पर विचार विमर्श हुआ। यह देखा गया कि अब इस विषय को सुप्रीम कोर्ट ने उमा देवी और केसरी मामले में तय किए नियम के अनुसार डील किया जाए। तालमेल समिति के सदस्यों ने कहा कि पंजाब सरकार ने 2011 में रेगुलराइजेशन पालिसी बनाई है।

उसे नीति हरियाणा में भी लागू किया जाए। बैठक में ही 18 मार्च, 2011 की रेगुलराइजेशन पालिसी के तथ्य भी देखे गए। यह फैसला किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी और केसरी मामले में दिए फैसलों के अनुसार और पंजाब सरकार की रेगुलराइजेशन पालिसी के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर हरियाणा सरकार अपनी रेगुलराइजेशन पालिसी बनाएगी।

मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक

इसके अलावा जो कर्मचारी पिछली कई रेगुलराइजेशन पालिसी के अनुसार किसी भी कारण से रेगुलर होने से वंचित रह गए थे उन पर भी रेगुलराइज करने के लिए विचार विमर्श किया जाएगा।’

इस बीच कर्मचारी तालमेल समिति के सदस्य राज सिंह दहिया, भगीरथ सिंह कठैत और अन्य ने मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव आरएस दून से सोमवार को मुलाकात कर मांग की कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के अनुसार रेगलुराइजेशन पालिसी जल्द से जल्द जारी की जाए।

यह है उमा देवी फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने उमा देवी मामले में फैसला सुनाया था कि 10 अप्रैल, 2006 तक जिन कच्चे कर्मचारियों को 10 साल हो गए हैं, उन्हें रेगुलर किया जाएगा। इसके बाद हर पद पर सिर्फ रेगुलर कर्मचारी ही रखे जाएं।

बैक डोर से कोई कर्मचारी न रखा जाए। एमएल केसरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उमा देवी वाले फैसले में जो दस साल की सीमा रखी थी, उसके अनुसार अवैध तरीके से भर्ती किए कच्चे कर्मचारी पक्के नहीं हो सकेंगे जबकि सही तरीके से रखे गए योग्यता पूरी करने वाले और रिक्त पदों पर रखे गए ऐसे कर्मचारी पक्के हो सकेंगे।
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ये कहती है सरकार

बेशक बैठक की कार्रवाई में उमा देवी और केसरी मामले का जिक्र है मगर मुख्यमंत्री ने यह मांग स्वीकार कर रखी है कि रेगुलराइजेशन पालिसी पंजाब सरकार की तर्ज पर बनाई जाएगी। उसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
एससी चौधरी, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार
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