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पंजाब के 31 लाख परिवारों के लिए बुरी खबर

Tue, 02 Dec 2014 04:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी आटा-दाल स्कीम फिर लटक गई है। सरकार ने इस स्कीम के लिए बने नीले कार्डों की नए सिरे से वेरिफिकेशन करवाने का फैसला किया है। राज्य भर में बने 31 लाख नीले कार्डों की जांच पूरी होने तक राशन जारी नहीं किया जाएगा।
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पंजाब सरकार ने 2007 में सत्ता में आने के बाद आटा-दाल स्कीम लागू की थी। इसमें चार रुपये प्रति किलो गेहूं और बीस रुपये प्रति किलो दाल दी जाती थी। इस स्कीम में 16 लाख लाभार्थी थे। यूपीए सरकार की ओर से फूड सिक्योरिटी एक्ट लागू किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने भी आटा-दाल स्कीम का दायरा बढ़ाया।

नवंबर 2013 में नई स्कीम लागू की गई, जिसमें एक रुपये प्रति किलो गेहूं और बीस रुपये प्रति किलो दाल दी जाती थी। इसमें 31 लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 31 लाख हो गई। यह स्कीम शुरू से ही विवादों से घिरी रही। विपक्ष ने भी इसे लेकर सरकार पर हमले बोले। शुरू से ही जाली कार्डों का मामला उठता रहा। जो परिवार वाकई पात्र थे, उनके कार्ड बने नहीं और रसूखदार संपन्न लोगों के कार्ड बना दिए गए।
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पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट मीटिंग में भी यह मुद्दा उठा। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल समेत कई मंत्रियों ने नीले कार्डों में गड़बड़ी की बात उठाई। इसके बाद सरकार ने नए सिरे से सारे नीले कार्डों का वेरिफिकेशन कराने की हिदायत दी है। फूड सप्लाई विभाग अभी असमंजस में है कि 31 लाख कार्डों का वेरिफिकेशन कैसे होगा।

कुछ जिलों में विभागीय अधिकारियों ने डिपो होल्डरों से कहा है कि वे अपने कार्ड धारकों का वेरिफिकेशन करें। उनके आधार कार्ड, पुराना राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच करें। सरकार ने हिदायत दी है कि जांच पूरी होने तक राशन जारी नहीं किया जाएगा। सितंबर 2014 को राशन आया था, दिसंबर में आना था, जो रुक जाएगा।

डिपो होल्डर नहीं करेंगे वेरिफिकेशन
डिपो होल्डरों ने साफ कर दिया है कि वे नीले कार्डों का वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। इससे सरकार की मुसीबत बढ़ सकती है, क्योंकि 31 लाख कार्डों की जांच आसान नहीं होगी। पंजाब डिपो होल्डर्स एसोसिएशन केप्रधान गुरजिंदर सिद्धू ने कहा कि पहले 16 कार्डों की वेरिफिकेशन डिपो होल्डरों से कराई। सारा ब्योरा ऑनलाइन कराया, जिस पर पांच रुपये प्रति कार्ड खर्च आया। वादा करने के बाद भी सरकार ने वह खर्च नहीं दिया।

राशन के ट्रांसपोर्टेशन का पूरा खर्च भी नहीं मिल रहा। एसोसिएशन कार्डों की जांच का स्वागत करती है, क्योंकि बड़ी संख्या में जाली कार्ड बने थे, लेकिन डिपो होल्डर वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। सरकार किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराए।
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