खड्डी पुल पर नाके के दौरान पुलिस ने नौ वर्षों से भगौड़े आरोपी को पकड़ने में कामयाबी पाई। पुलिस के अनुसार उसके पास से 270 ग्राम नशीला पाउडर भी बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी लोगों को बाबा बनकर लंबे समय से चकमा दे रहा था।
पहचान छुपाने के लिए उसने कई शहरों में नाम बदलकर ठिकाना बनाता। वह धोखाधड़ी, कत्ल व इरादा-ए-कत्ल के कई मामलों में वांछित है। मंगलवार को खड्डी पुल पर नाके के दौरान पुलिस कर्मियों ने देखा की एक व्यक्ति अबरोल नगर से खड्डी पुल की ओर जा रहा है। शक होने पर उसे पकड़ कर पूछताछ की गई तो उसकी पहचान सतिंद्र कुमार बिट्टू उर्फ बाबा उर्फ सचिदानंद उर्फ पटवारी निवासी धरमपुरा, कादियां के रूप में हुई।
सतिंद्र के पास से 270 ग्राम नशीला पाउडर बरामद किया गया। पुलिस ने तुरंत सतिंद्र को हिरासत में ले लिया। सतिंद्र पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। सीआईए स्टाफ इंचार्ज अश्विनी शर्मा ने बताया कि सतिंद्र पर कई आपराधिक मामलों में पहले से नामजद है। वह साल 2005 से ही भगोड़ा घोषित था। वह पिछले 9 वर्षों से अपनी पहचान छुपाने के लिए विभिन्न शहरों में नाम बदलकर रह रहा था।
पेशी के दौरान हुआ था फरार
लुधियाना जेल में बंद होने के दौरान 29 दिसंबर 2009 को पुलिस के दो जवान गुरदीप सिंह व प्रगट सिंह सतिंद्र को पुराने मामलों की पेशी के लिए बटाला लेकर जा रहे थे। तक पेशी से लौटते समय जालंधर के पीएपी चौक से दोनों पुलिस मुलाजिमों को चकमा देकर फरार हो गए थे। इसके बाद सतिंद्र को फिर गिरफ्तार नहीं किया जा सका था।
नशा तस्कर को 10 साल की सजा
गुरदासपुर । अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केके बांसल की अदालत ने मंगलवार को नशा तस्करी करने वाले एक व्यक्ति को 10 वर्ष की कैद तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामले के अनुसार सीआईए स्टाफ तथा पुलिस स्टेशन सदर की पुलिस की ओर से 18 नवंबर 2010 को प्रभजोत सिंह निवासी तिब्बड़ को 550 ग्राम नशीले पाउडर सहित गिरफ्तार किया गया था।
मुखबिर की सूचना पर तिब्बड़ के समीप स्थित भट्ठे के निकट से प्रभजोत सिंह को रोककर उसकी तालाशी ली गई तो उसके पास से 550 ग्राम नशीला पाउडर बरामद किया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त व जिला सत्र न्यायाधीश केके बांसल की अदालत ने सरकारी वकील सरूप सिंह विरदी की दलीलों से सहमत होते हुए प्रभजोत सिंह को 10 वर्ष कैद तथा एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई।