तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती है, जो बेहद चिंता की बात है। जनसंख्या और वाहनों की संख्या में वृद्धि के अलावा, दशकों से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।
हर परिवार के पास दो वाहन
चंडीगढ़ मूलरूप से पांच लाख वाहनों के लिए डिजाइन किया गया था लेकिन एक जनवरी 2000 से 21 अक्तूबर 2021 के बीच साढ़े छह लाख से ज्यादा नए वाहन सड़कों पर उतरे हैं। चंडीगढ़ जैसे छोटे शहर के लिए ये संख्या बहुत ज्यादा है। आलम ये है कि शहर में प्रति परिवार वाहनों की संख्या दो है।
पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या में वृद्धि से वायु गुणवत्ता में कमी आई है और वायु तापमान में वृद्धि हुई है जो लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। बढ़ती जनसंख्या से शहर के बुनियादी ढांचे जिनमें, सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता, शिक्षा, परिवहन और आवास पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
बीते दिनों होटल माउंट व्यू में चंडीगढ़ प्रशासन और यूएनडीपी के दो दिवसीय सम्मेलन में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कई चुनौतियां पर चर्चा की थी और लोगों से कुछ सुझाव मांगे थे। उन्होंने पूछा कि सड़कों पर लगातार बढ़ रहे निजी वाहनों के प्रति हमारी नीति क्या होनी चाहिए? क्या हमें चंडीगढ़ में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण करना चाहिए। उन्होंने कार्बन न्यूट्रल का भी जिक्र किया और पूछा कि क्या 2030 तक चंडीगढ़ कार्बन न्यूट्रल बन सकता है, क्योंकि पर्यावरण पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।